Tuesday, January 20, 2026

उद्देश्य की खोज में ही न खप जाएं Don't get lost in the pursuit of purpose

 उद्देश्य की खोज में ही न खप जाएं
Don't get lost in the pursuit of purpose






जीवन में उद्देश्यों (मक़सदों) का होना हमें काम करने के लिए प्रेरित करता है और हमारे काम को दिशा देता है।
परंतु हर समय अपने उद्देश्य/मकसदों के पीछे भागना हमें बुरी तरह थका देता है।
कई बार हम अपने जीवन को इतने उद्देश्यों से भर देते हैं कि प्रेरित करने वाला उद्देश्य हमारे ही विपरीत चला जाता है। 
यहां तक कि अच्छी मंशा से किए जाने वाले कामों की अति भी हमें शारीरिक और भावनात्मक रूप से थका देती है।
हमारे उद्देश्य हमें स्वयं से जोड़ते हैं, दूर नहीं करते।
हमारे उद्देश्य हमारे जीवन में सहजता लाते हैं। इसमें जल्दबाजी, लेन-देन या किसी भी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए।
कभी कभी हम अपने उद्देशों को जल्दबाजी में निर्धारित कर लेते हैं।
अगर अपनी पसन्द का कार्य करते हुए भी लगातार थकान महसूस कर रहे हैं तो संकेत है कि अब पीछे हटने का समय है।
उद्देश्य को अपनी पहचान या उपयोगिता न बनाएं।
उद्देश्य को ही अपना महत्व मानने वाले लोग अपने अनुभव को तनावपूर्ण बना लेते हैं। और लगातार एक काम से दूसरे काम के पीछे दौड़ते रहते हैं।
केवल उपलब्धि से आप अपने अतीत के घाव नहीं भर सकते हैं।
अतीत के प्रति सामान्य रूप से प्रयास करना चाहिए और जो कमी/आघात/घाव हो उसे दूर करने हेतु आवश्यक उपाय करने चाहिए। इसके बाद भी न हो तो उससे दूरी बनाए और उसे समय पर छोड़ दें।
परिणाम को सोचे बिना अपना काम करने में खुशी प्राप्त होगी।
जो लक्ष्य, उद्देश्य, मकसद तय कर लिया है उसके साथ आगे बढ़ने में खुशी महसूस नहीं कर रहे हैं तो उस पर पुनः विचार करें।
।। जय श्री कृष्ण।।

Monday, October 27, 2025

मन, मस्तिष्क और आत्मा mind, brain and soul

 मन, मस्तिष्क और आत्मा mind, brain and soul








मन, मस्तिष्क और आत्मा में क्या रिश्ता है? 
ये कैसे कार्य करते हैं? 


इन तीनों का परस्पर रिश्ता न केवल वैज्ञानिकों, दर्शन शास्त्रियों, बल्कि सामान्य जन के लिए भी कौतूहल का विषय बना हुआ है।


मन की बात करें तो इसकी कोई सरंचना या आकार नही है। ये केवल मस्तिष्क द्वारा किए जाने वाले कार्यों का एक आभास है।


इसे मस्तिष्क की किसी एक निश्चित सीमा में नहीं बांधा जा सकता है।


चेतना,बोध, व्यवहार,बुद्धि, भाषा,प्रेरणा, और सदा उत्कृष्टता को पाने की इच्छा -ये सब मन के स्वरूप हैं। इनका मनुष्य आभास कर सकता है, इन्हें आकार नही दे सकता।

पर मन और शरीर में अन्तर है। शरीर विभिन्न अंगों में बटा हुआ एक ढांचा है। यह मानव शरीर में होने वाली सभी कार्य प्रणाली संपादित करता है।


मन अविभाजित है, आकार नही, केवल आभास है।
आत्मा को अदृश्य, अव्यक्त परमात्म स्वरूप माना गया है।
इसे अभी तक कोई भी सम्पूर्ण रूप से समझ नहीं पाया है।
इस प्रकार मस्तिष्क शरीर का ही एक अंग है।


अतः मन, मस्तिष्क और आत्मा के बीच का सेतु है।
इस रहस्य को केवल परमात्मा की कृपा से ही जाना या समझा जा सकता है।
।।जय श्री कृष्ण।।

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Tuesday, September 9, 2025

वाणी की चार अवस्थाएं vaanee kee chaar avasthaen

 वाणी की चार अवस्थाएं 

वाणी  की चार अवस्थाएँ हैं, जिनका वर्णन वैदिक और तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है।



1. परा वाणी (Para Vani)

यह वाणी की सबसे सूक्ष्म अवस्था है।


इसे "मूल" या "बीज" स्वरूप कहा जाता है।


यह कंठ से भी गहरी—मूलाधार चक्र (कुंडलिनी) में स्थित मानी जाती है।


इसमें शब्द अभी केवल "अविचारित संकल्प" के रूप में रहते हैं, बाहर प्रकट नहीं होते।


यह ब्रह्म स्वरूप, दिव्य और मौन वाणी है।


2. पश्यन्ती वाणी (Pashyanti Vani)

"पश्यन्ती" का अर्थ है "देखना"।


यह वाणी की वह अवस्था है जब शब्द रूपी विचार "दृश्य" या "चित्र" के रूप में अंतःकरण में प्रकट होने लगते हैं।


यह नाभि या हृदय क्षेत्र में स्थित मानी जाती है।


यहाँ वाणी ध्वनि में परिवर्तित होने की तैयारी में होती है, लेकिन अभी ध्वनि नहीं बनी है।


3. मध्यमा वाणी (Madhyama Vani)

यह वाणी की मध्य अवस्था है।


इसमें विचार मन और बुद्धि के माध्यम से आकार लेते हैं।


यह वाणी कंठ (गले) में रहती है।


यहाँ तक पहुँचने पर शब्द रूपी विचार "भाषा" का रूप लेने के लिए तैयार हो जाते हैं।


4. वैखरी वाणी (Vaikhari Vani)

यह वाणी का सबसे स्थूल और प्रकट रूप है।


यही हमारी बोलचाल की भाषा है।


इसका स्थान जिव्हा (जीभ, होंठ, तालु आदि उच्चारण अंग) हैं।


यहाँ वाणी श्रवणीय ध्वनि के रूप में बाहर आती है।


संक्षेप में:

परा – बीज रूप (मूलाधार, मौन)


पश्यन्ती – दृश्य रूप (हृदय, भाव/चित्र)


मध्यमा – मानसिक रूप (कंठ, भाषा का आकार)


वैखरी – वाचिक रूप (जिह्वा, प्रकट शब्द)



मैं आपको वाणी की चार अवस्थाओं को एक सुंदर तालिका के रूप में प्रस्तुत करता हूँ।

वाणी की चार अवस्थाएँ – तालिका

वाणी की अवस्था, स्थान, (चक्र/अंग)स्वरूप, विशेषता-


परा- मूलाधार चक्र (कुंडलिनी)बीज रूप, मौन शब्द संकल्प रूप में; अभी ध्वनि नहीं।


पश्यन्ती- हृदय/नाभि क्षेत्र दृश्य रूप विचार चित्र/भाव के रूप में प्रकट होते हैं।


मध्यमा- कंठ (गला)मानसिक रूप शब्द भाषा का रूप लेने लगते हैं।


वैखरी- जिह्वा, तालु, होंठ वाचिक रूप श्रवणीय ध्वनि, बोलचाल की भाषा।

साधारण रूप में

वैखरी वाणी (जिह्वा - प्रकट शब्द) 

मध्यमा वाणी (कंठ - मानसिक भाषा)

पश्यन्ती वाणी (हृदय/नाभि - भाव/चित्र)

परा वाणी (मूलाधार - मौन बीज)

 इसे ऐसे समझें:

परा = बीज।


पश्यन्ती = भाव/चित्र।


मध्यमा = विचार/भाषा का रूप।


वैखरी = प्रकट शब्द (हमारी बोली)।


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Tuesday, September 2, 2025

चन्द्रग्रहण 2025 lunar eclipse 2025

 भारत में दृश्य खग्रास  चन्द्रग्रहण 

सितम्बर 2025 में होने वाले चन्द्रग्रहण का विवरण 




दिनांक 07 सितंबर 2025 भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा रविवार को भारतीय समयानुसार रात्रि 09 बजकर 57 मिनट से देर रात 01 बजकर 27 मिनट तक होने वाला खग्रास चन्द्रग्रहण संपूर्ण भारत में दिखाई देगा।
भारत के सभी शहरों व गांवों से इसका प्रारम्भ, मध्य तथा मोक्ष स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।


यह दक्षिण-पश्चिम की ओर से ग्रसित होकर उत्तर- पूर्व की ओर मोक्ष को प्राप्त होगा।


इस ग्रहण को भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, तुर्की, इजरायल, सऊदी अरब समेत पूरा मिडिल ईस्ट,  

जिंबाम्बे, अंगोला, अल्जीरिया, मिश्र, सूडान समेत पूरा अफ्रीकी प्रायद्वीप,

यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, ब्रिटेन, ग्रीस, नार्वे, स्वीडन समेत पूरा यूरोप,

रूस, कजाकिस्तान, कोरिया, थाईलैंड, जापान, म्यांमार, बैंकॉक, मलेशिया, फिलिपींस, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, चीन आदि पूर्वी देशों से (केवल उत्तरी व दक्षिण अमेरिका छोड़कर) अन्य सभी देशों से देखा जा सकेगा। 


सूतक - खग्रास चन्द्रग्रहण का सूतक दिन में 12 बजकर 57 मिनट से प्रारम्भ हो जाएगा। सूतक में बाल, वृद्ध, रोगी वह आसक्तजनों को छोड़कर अन्य किसी को भोजन शयनादि नहीं करना चाहिए।

यह ग्रहण पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और कुम्भ राशि में हो रहा है अतः इनमें जन्म लेने वाले जातकों पर भारी अर्थात् कष्टकारी होता है।


इसके लिए यथाशक्ति दान पुण्य करना शुभ रहता है।

अतः ग्रहण स्पर्श के समय स्नान मध्य में हवन और पूजन तथा ग्रहण मोक्ष के समय श्रद्धा से अन्न,वस्त्र, धन आदि का दान और ग्रहण सर्वमुक्त होने पर पुनः स्नान करना चाहिए।


विशेष - ग्रहण के दिन रात्रि में स्नान- दानादि का निषेध नहीं होता है- 

चन्द्रग्रहणे तथा रात्रौ स्नानं दानं प्रशस्यते।।



सूर्य और चन्द्र ग्रहण विवरण सन् 2025-26 Solar and Lunar Eclipse Details 2025-26

सूर्य और चन्द्र ग्रहण विवरण सन् 2025-26

Solar and Lunar Eclipse Details 2025-26



३० मार्च २०२५ से १९ मार्च २०२६ तक विक्रम सम्वत् २०८२ में समस्त भूमण्डल पर दो सूर्यग्रहण तथा दो चन्द्रग्रहण होंगे।


जिनमें से भारतीय भूभाग पर ०७ सितम्बर २०२५ भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा रविवार को होने वाला खग्रास चन्द्रग्रहण तथा ०३ मार्च २०२६ फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार को होने वाला खग्रास चन्द्रग्रहण ही दिखाई देंगे।
जिनका सूतक तथा ग्रहण विधान माना जाएगा।


अन्य दो सूर्यग्रहण का भारत में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये दोनों सूर्यग्रहण भारत में भी दिखाई देंगे।

Youtube link-

 http://youtube.com/post/UgkxqUKapZ9meM-ZUZ5TfWU9gNU6taJWPquP?si=ogePVGm7lVoPYvRi

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