Sunday, March 8, 2026

रामरक्षास्तोत्रम् ramraksha stotra

रामरक्षास्तोत्रम्



विनियोगः-


अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः। श्री सीतारामचन्द्रो देवता। अनुष्टुप् छन्दः। सीता शक्तिः। श्रीमान् हनुमान् कीलकं। श्री सीतारामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोत्रजपे विनियोगः।


जल को धरती पर छोड़कर भगवान राम का ध्यान करें


ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं,
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्।
 

वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं,
नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम् ।।

श्रीरामरक्षा स्तोत्र पाठ

चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् । 
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ।। 1।।


ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
 जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ।।2।।


सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्।।3।।


रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्। 
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः।। 4।।


कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः।।5।।


जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः। 
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ।।6।।
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित्। 
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः।।7।।


सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः।
 ऊरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत् ।।8।।


जानुनी सेतुकृत्पातु जंघे दशमुखान्तकः।
 पादौ विभीषणश्रीद:पातु रामोऽखिलं वपुः।।9।।


एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।
 स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ।।10।।

पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः।
 न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः।।11।।


रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्।
 नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति।।12।।


जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्।
 यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः।।13।।


वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। 
अव्याहताज्ञ: सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्।।14।।


आदिष्टवान्यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः।
 तथा लिखितवान्प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः।।15।।


आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्।अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान्स नः प्रभुः ।।16।।

तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ। 
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ।।17।।


फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ। 
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ।।18।।


शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्। 
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ।।19।


आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा-
वक्षयाशुगनिषङ्गसङ्गिनौ।
 रक्षणाय मम रामलक्ष्मणा-
वग्रतः पथि सदैव गच्छताम् ।।20।।


सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा। 
गच्छन् मनोरथान्नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः।।21।।


रामो दाशरथि: शूरो लक्ष्मणानुचरो बली। 
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ।।22।।


वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः। 
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः।।23।।


इत्येतानि जपन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः। 
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः।।24।।


रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम्। 
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरा:।।25।।


रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं 
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्।
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिं
 वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्।।26।।


रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। 
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ।।27।।


श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम।श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम।श्रीराम राम शरणं भव राम राम।।28।।


श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि
 श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि।
 श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि
 श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ।।29।।


माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु-
र्नान्यं जाने नैव जाने न जाने ।।30।।


दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा। 
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ।।31।।


लोकाभिरामं रणरंगधीरं

राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
 
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं
 
श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ।।32।।


मनोजवं मारुततुल्यवेगं
 
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
 
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
 
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ।।33।।


कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्।
 
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ।।34।।


आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। 
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्।।35।।


भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्।
 तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ।।36।।


रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे 
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् 
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर।।37।।


राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। 
सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।38।।


।।इति श्रीबुधकौशिकमुनिविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं संपूर्णम्‌।।


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भद्रा Bhadra

Thursday, February 26, 2026

भारत में दृश्य खग्रास चन्द्र ग्रहण

 भारत में दृश्य खग्रास चन्द्र ग्रहण 


03 मार्च 2026 फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा मंगलवार को भारतीय स्टैंडर्ड समय के अनुसार दिन में 03:20 से सायं 06:47 मिनट तक खग्रास चन्द्र ग्रहण होगा।

भारत के अधिकांश भागों में चन्द्रमा ग्रसता हुआ ही उदय होगा।

ग्रहण का समापन पूर्ण देश में सायं 06:47 मिनट पर होगा।

इस चन्द्र ग्रहण का कुल समय 03 घंटा 27 मिनट होगा।

सूतक:-03 मार्च 2026को प्रातः 0620मिनट से सूतक प्रारम्भ हो जाएगा। इसके बाद सभी मंदिरों के पट बन्द रहेंगे व देव दर्शन नहीं हो पाएगा।

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होलिका दहन holika dahan 2026




 होलिका दहन 2026

संवत् 2082 में फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी के दिन अर्थात 02 मार्च 2026 को प्रदोष काल में पूर्णिमा और संपूर्ण रात्रि में भद्रा की व्याप्ति है। दूसरे दिन पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है किंतु पूर्णिमा की व्याप्ति साढ़े तीन प्रहर से अधिक है और प्रतिपदा तिथि वृद्धि गामी है, इसलिए शास्त्रवचन के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन  अर्थात 03 मार्च 2026 को होना चाहिए था।
परंतु 3 मार्च के दिन ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण है और ग्रहण काल तथा प्रदोष से पूर्व ही पूर्णिमा समाप्त हो रही है।
ऐसी स्थिति में धर्मसिंधु के अनुसार होलिका दहन पूर्व दिन ही करना चाहिए। 
दूसरे दिन में ग्रस्तोदय ग्रहण हो और प्रदोष काल में पूर्णिमा ना हो तो पूर्व दिन ही होलिका दहन पूजा करें।
साढे तीन प्रहर से अधिक पूर्णिमा और प्रतिपदा वृद्धिगामी होते हुए भी धर्मसिंधु में दिए हुए ग्रहण विचार के वचनानुसार होलिका दहन 02 मार्च 2026 को प्रदोष काल में करना शास्त्र सम्मत होगा।
इस दिन भद्रा सायंकाल 05:56 से मध्य रात्रि के बाद रात्रि शेष 29:29 मिनट अर्थात 03 तारीख की सुबह 05:29 तक रहेगी।
भद्रा के संबंध में शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि भद्रा निशीथ काल अर्थात मध्यरात्रि के बाद तक रहे तो फिर भद्रा में ही प्रदोष के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका का दहन करें।
इस वर्ष प्रदोष में भद्रा का मुख नहीं रहेगा इससे प्रदोष वेला में सूर्यास्त से 02 घंटे 24 मिनट तक या रात्रि में 26:37 से पूर्व होलिका दहन करना शास्त्रोक्त है।

भद्रा का पुच्छकाल 25:27 से 26:37 तक भी श्रेष्ठ रहेगा।

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Saturday, February 14, 2026

महाशिवरात्रि: आत्मबोध, साधना और शिवतत्व का महापर्व shivratri parva

 

🌙 महाशिवरात्रि : आत्मबोध, साधना और शिवतत्व का महापर्व



प्रस्तुतकर्ता: प्राकृत भविष्य दर्शन ज्योतिष एवं अनुष्ठान केन्द्र, कानपुर
सेवा, साधना, संस्कार और सनातन चेतना का आध्यात्मिक केंद्र।


महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य अवसर है। 

यह रात्रि अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की यात्रा का प्रतीक है। 

शिव का अर्थ है — कल्याण, मंगल और चेतना तथा रात्रि का अर्थ है — अंतरमुखी साधना। 

इस प्रकार महाशिवरात्रि का भावार्थ है — चेतना के कल्याण की रात्रि।


🔱 शिव का तात्त्विक स्वरूप
भगवान शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक तत्व (Cosmic Consciousness) हैं। 

वे सृष्टि के मूल स्रोत हैं —
आदि योगी — योग विज्ञान के प्रथम गुरु
महाकाल — समय के भी अधिपति
नीलकंठ — विष को धारण करने वाले
औघड़ — माया और भोग से परे स्थित
डमरू नाद ब्रह्म का प्रतीक है, त्रिशूल त्रिगुणों (सत्व, रज, तम) का नियंत्रण है और जटा में बहती गंगा शुद्ध चेतना का प्रवाह है।


🌑 महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य
शास्त्रों के अनुसार इस रात्रि पृथ्वी की ऊर्जा प्रवाह दिशा विशेष रूप से उत्तरमुखी होती है, जिससे ध्यान, साधना और तप की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। इसी कारण यह रात्रि योगियों, साधकों और तपस्वियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
यह रात्रि हमें सिखाती है —
मौन का महत्व
आत्मचिंतन
इंद्रिय संयम
मन की शुद्धि
अहंकार का विसर्जन


🕉️ शिवलिंग का रहस्यात्मक अर्थ
शिवलिंग केवल एक पूज्य प्रतीक नहीं, बल्कि सृष्टि और चेतना का संतुलन बिंदु है —
आधार = शक्ति (प्रकृति)
लिंग = शिव (चेतना)
अर्थात शिव-शक्ति का एकत्व ही सृष्टि का मूल आधार है।


🙏 व्रत और जागरण का वास्तविक भाव
व्रत का अर्थ केवल उपवास नहीं, बल्कि —
विचारों का उपवास
विकारों का त्याग
नकारात्मकता से विरक्ति
सत्संकल्प की स्थापना


जागरण का अर्थ है — अंतरचेतना का जागरण।
🌸 महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश
"शिव मंदिर में नहीं, चित्त में स्थित हैं।
शिव मूर्ति नहीं, मौन में प्रकट होते हैं।
शिव बाह्य नहीं, अंतरात्मा में अनुभव होते हैं।"


🕯️ आधुनिक जीवन में शिवतत्व की प्रासंगिकता
आज के तनावग्रस्त जीवन में शिव का स्वरूप हमें सिखाता है —
स्थिरता
धैर्य
वैराग्य
संतुलन
करुणा
मौन की शक्ति


🌼 उपसंहार
महाशिवरात्रि केवल पूजन का पर्व नहीं, यह आत्मिक जागरण का महापर्व है। यह रात्रि हमें बाह्य संसार से हटकर अंतर संसार की यात्रा कराती है। जब मन शांत होता है, अहंकार गलता है और चेतना स्थिर होती है — तभी शिव का साक्षात्कार होता है।
"शिव बाहर नहीं मिलते, शिव भीतर जागते हैं।
शिव खोज नहीं, अनुभूति हैं।
शिव साधना नहीं, स्वयं की पहचान हैं।"
🔱 हर हर महादेव 🔱


प्राकृत भविष्य दर्शन ज्योतिष एवं अनुष्ठान केन्द्र, कानपुर
सनातन संस्कृति • आध्यात्मिक साधना • ज्योतिष • अनुष्ठान • सेवा
📿 शिवतत्व से जीवन शिवमय बने — यही हमारा उद्देश्य है

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Tuesday, January 20, 2026

उद्देश्य की खोज में ही न खप जाएं Don't get lost in the pursuit of purpose

 उद्देश्य की खोज में ही न खप जाएं
Don't get lost in the pursuit of purpose






जीवन में उद्देश्यों (मक़सदों) का होना हमें काम करने के लिए प्रेरित करता है और हमारे काम को दिशा देता है।
परंतु हर समय अपने उद्देश्य/मकसदों के पीछे भागना हमें बुरी तरह थका देता है।
कई बार हम अपने जीवन को इतने उद्देश्यों से भर देते हैं कि प्रेरित करने वाला उद्देश्य हमारे ही विपरीत चला जाता है। 
यहां तक कि अच्छी मंशा से किए जाने वाले कामों की अति भी हमें शारीरिक और भावनात्मक रूप से थका देती है।
हमारे उद्देश्य हमें स्वयं से जोड़ते हैं, दूर नहीं करते।
हमारे उद्देश्य हमारे जीवन में सहजता लाते हैं। इसमें जल्दबाजी, लेन-देन या किसी भी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए।
कभी कभी हम अपने उद्देशों को जल्दबाजी में निर्धारित कर लेते हैं।
अगर अपनी पसन्द का कार्य करते हुए भी लगातार थकान महसूस कर रहे हैं तो संकेत है कि अब पीछे हटने का समय है।
उद्देश्य को अपनी पहचान या उपयोगिता न बनाएं।
उद्देश्य को ही अपना महत्व मानने वाले लोग अपने अनुभव को तनावपूर्ण बना लेते हैं। और लगातार एक काम से दूसरे काम के पीछे दौड़ते रहते हैं।
केवल उपलब्धि से आप अपने अतीत के घाव नहीं भर सकते हैं।
अतीत के प्रति सामान्य रूप से प्रयास करना चाहिए और जो कमी/आघात/घाव हो उसे दूर करने हेतु आवश्यक उपाय करने चाहिए। इसके बाद भी न हो तो उससे दूरी बनाए और उसे समय पर छोड़ दें।
परिणाम को सोचे बिना अपना काम करने में खुशी प्राप्त होगी।
जो लक्ष्य, उद्देश्य, मकसद तय कर लिया है उसके साथ आगे बढ़ने में खुशी महसूस नहीं कर रहे हैं तो उस पर पुनः विचार करें।
।। जय श्री कृष्ण।।

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त Mantra theory for suffering peace

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त  Mantra theory for suffering peace संसार की समस्त वस्तुयें अनादि प्रकृति का ही रूप है,और वह...