Monday, January 24, 2022

व्यापार/व्यवहार हेतु क्रय विक्रय नक्षत्र Purchase/sale constellation for business/dealing

 व्यापार/व्यवहार हेतु क्रय विक्रय नक्षत्र 
Purchase/sale constellation for business/dealing   

  क्रय विक्रय अर्थात् किसी वस्तु का खरीदना और बेचना कब उचित रहेगा जबकि हम उस वस्तु का व्यापार करते हों।
जिस प्रकार वाहनादि क्रय करने के मुहूर्त होते हैं उसी प्रकार कुछ नक्षत्र होते हैं जिनमे हम किसी व्यापारिक वस्तुओं की खरीद और बिक्री करें तो उससे अपने लाभ को बढ़ा सकते हैं।
हमें अपनी सामर्थ्य और संपत्ति के अनुसार ही व्यापार करना चाहिए। ज्योतिष से लाभ उठाने वालों को योग्य ज्योतिषी द्वारा अपने शुभाशुभ समय का ज्ञान करवा लेना चाहिए। अशुभ समय अर्थात् बुरे दिनों के फेर से कभी-कभी भारी घाटा लग जाता है।भाग्यका कर्ता समय सर्वोपरि है।काल की सत्ता को सभी नमन करते हैं।खोटे ग्रहों के दुष्प्रभाव को विनष्ट करने में धर्म सर्वोपरि है।कहा गया है-
धर्मेणहन्यते व्याधि:,धर्मेणहन्यते ग्रहा:।
धर्मेणहन्यते शत्रु:,यतो धर्मस्ततो जय:।।

खरीदने के नक्षत्रों में बेचना और बेचने के नक्षत्र वारादि में खरीदना सुनिश्चित रूप से घाटे का सौदा जानना चाहिए। जो वस्तु, पशु, धन जिस ग्रह के कारकत्व में आता है(देखें vedic vidha/तेजी मन्दी परिज्ञानम्)उसे उससे संबंधित ग्रह के नक्षत्र, वार में युक्तियुक्त विचार कर बेचा या खरीदा जा सकता है।

वस्तु खरीदने के नक्षत्र:- अश्विनी, चित्रा, स्वाती, श्रवण, शतभिषा, रेवती,तथा वारों में बुध रवि सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।

वस्तु बेचने के नक्षत्र:- भरणी, कृतिका, अश्लेषा, विशाखा, तीनो पूर्वा यह 7 नक्षत्र और गुरुवार, सोमवार श्रेष्ठ माने गए हैं।

लेनदेन के लिए वर्जित समय- रविवार, मंगलवार,संक्रांति, दिन वृद्धि योग और हस्त नक्षत्र में यदि ऋण ले तो कभी मुक्त ना हो। बुधवार को द्रव्य अनावश्यक नहीं देना चाहिए।
इसे यूट्यूब चैनल पर देखें:-क्रय विक्रय नक्षत्र

गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार शुभाशुभ नक्षत्र प्रस्तुत हैं:-

गोस्वामी तुलसीदास जी के मतानुसार शुभ नक्षत्र-
श्रुति गुन कर गुन यु जुग मृग हय रेवती सखाउ।
देहि लेहि धन धरनि धरु गएहुं न जाइहि काउ।।
अर्थात्  अश्विनी,मृगसिरा,पुनर्वसु,पुष्य,हस्त,चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण,धनिष्ठा, शतभिषा, और रेवती हैं। जिनमें जमीन जायदाद संबंधी लेनदेन में व्यय होने पर या बहु लाभकारी योजना में लगाया जाने पर धन जाता हुआ प्रतीत होने पर भी नहीं जाएगा अर्थात नुकसान नहीं होगा।

ऊ गुन पू गुन वि अज कृ म आ भ आ मू गुनु साथ।
हरो धरो गाड़ो दियो धन फिर चढइ न हाथ।।
अर्थात्
अशुभ नक्षत्र हैं-भरणी, कृतिका, रोहिणी, आर्द्रा, अश्लेषा, मघा,विशाखा, मूल,तीनो पूर्वा और तीनों उत्तरा हैं।इन 14 नक्षत्रों में हरा हुआ(चोरी गया हुआ),धरोहर रखा हुआ,गाड़ा गया या कारोबार में लगाया गया तथा उधार दिया हुआ धन फिर लौट कर हाथ नहीं लगता है।
टिप्पणी- इन नक्षत्रों के अलावा भद्रा तथा व्यतिपात योग में जो द्रव्य किसी को दिया जाए, पृथ्वी में गाड़ा जाए या किसी व्यवहार में लगाया जाए या बैंक में जमा किया जाए, अथवा चोरी आदि में चला जाए तो वह फिर प्राप्त नहीं होता।यथा-

तीक्ष्ण मिश्र ध्रुवोग्रैर्यद् द्रव्यं दत्तं निवेशितम्।
प्रयुक्तं च विनिष्टं च विष्ट्या पाते च नाप्यते।।


मुहूर्त चिंतामणि के इस श्लोक में केवल एक नक्षत्र ज्येष्ठा के अलावा अन्य सब निषिद्ध नक्षत्र वही है जो गोस्वामी जी ने बताए हैं। मघा के बजाय ज्येष्ठा को अशुभ माना है। अतः मघा को द्रव्य प्रयोग में न अशुभ न शुभ बल्कि मध्यम समझना चाहिए और आवश्यकता में तत्परक तिथि वार शुभ होने पर ही उसे उपयोग में लेना चाहिए।
Releted topic-

Friday, January 7, 2022

तेजी मन्दी परिज्ञानम् fast bearish knowledge

तेजी मन्दी परिज्ञानम्

fast bearish knowledge

पञ्चाङ्ग में मास तिथि वार नक्षत्र योग और मेषादि संक्रांतियों के ध्रुवांक जोड़कर लिख दिए जाते हैं। जिन्हें तेजी मंदी सूचकांक कहते हैं बीच के कॉलम में वस्तु ध्रुवांक लिखे हैं। जिस मास में जिस वस्तु की तेजी मंदी ज्ञात करनी हो उसी मास के तेजी मंदी सूचकांकों में वस्तु ध्रुवांक जोड़कर 3 से भाग देने पर एक बचे तो मंदी हो,दो बचे तो भाव समान रहे और यदि 0 शेष बचे तो वह वस्तु तेज होगी ऐसा जाने।

भाव कितने बढ़ेंगे या घटेंगे?


चंद्र दर्शन एवं सूर्य संक्रांति के मुहूर्तों का चालू मार्केट के रुख पर बहुत ही प्रभाव पड़ता है। इसलिए चंद्रमा एवं संक्रांति का मुहूर्त कितना है।यह प्रत्येक पक्ष में लिखा रहता है। सामान्यतया संक्रांति व चंद्र दर्शन मुहूर्त, 15 तेजी के,30 समभाव के और 45 मन्दी के सूचक होते हैं।


नक्षत्र ग्रह वेध-


नक्षत्र दृष्टि तथा ग्रहों का नक्षत्र व राशिचार, उदय,अस्त तथा वक्री-मार्गी होने का बहुत भारी प्रभाव चालू मार्केट पर पड़ता है।

संक्रांति कालीन कुंडली में सूर्य शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो सूर्याश्रित राशि के प्रभावांतर्गत आने वाली वस्तुओं का बाजार भाव बढ़ जाता है अशुभ ग्रहों से दृष्ट या युद्ध होने पर भाव घट जाते हैं। अमावस्या अथवा पूर्णिमा को चंद्रमा शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो चंद्र आश्रित नक्षत्र आधीन वस्तुओं के भाव बढ़ जाते हैं अशुभ ग्रह युति या दृष्ट होने पर भाव घटा करते हैं सूर्य चंद्र ग्रह संयोगात् के अभाव में मुहूर्तदर्शन का प्रभाव परिलक्षित होता है।

सूर्य,चंद्रमा व बुध से जिस समय जैसे ग्रह का वेध लगेगा। वैसी ही प्रतिक्रिया व्यापार जगत में होगी। जैसे सूर्य चंद्र बुध का वेध होने पर सरकार व्यापार का निरीक्षण करने लगती है। छापे पड़ते हैं या आयात निर्यात संबंधी विचार-विमर्श होने लगता है।


शुभाशुभ नक्षत्र-


श्रुति गुन कर गुन यु जुग मृग हय रेवती सखाउ।

देहि लेहि धन धरनि धरु गएहुं न जाइहि काउ।।

गोस्वामी तुलसीदास जी के मतानुसार शुभ नक्षत्र- अश्विनी,मृगसिरा,पुनर्वसु,पुष्य,हस्त,चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण,धनिष्ठा, शतभिषा, और रेवती हैं। जिनमें जमीन जायदाद संबंधी लेनदेन में व्यय होने पर या बहु लाभकारी योजना में लगाया जाने पर धन जाता हुआ प्रतीत होने पर भी नहीं जाएगा अर्थात नुकसान नहीं होगा।


ऊ गुन पू गुन वि अज कृ म आ भ आ मू गुनु साथ।

हरो धरो गाड़ो दियो धन फिर चढइ न हाथ।।


अशुभ नक्षत्र-भरणी, कृतिका, रोहिणी, आर्द्रा, अश्लेषा, मघा,विशाखा, मूल,तीनो पूर्वा और तीनों उत्तरा हैं।इन 14 नक्षत्रों में हरा हुआ(चोरी गया हुआ),धरोहर रखा हुआ,गाड़ा गया या कारोबार में लगाया गया तथा उधार दिया हुआ धन फिर लौट कर हाथ नहीं लगता है।

टिप्पणी- इन नक्षत्रों के अलावा भद्रा तथा व्यतिपात योग में जो द्रव्य किसी को दिया जाए, पृथ्वी में गाड़ा जाए या किसी व्यवहार में लगाया जाए या बैंक में जमा किया जाए, अथवा चोरी आदि में चला जाए तो वह फिर प्राप्त नहीं होता।यथा-


तीक्ष्ण मिश्र ध्रुवोग्रैर्यद् द्रव्यं दत्तं निवेशितम्।

प्रयुक्तं च विनिष्टं च विष्ट्या पाते च नाप्यते।।


मुहूर्त चिंतामणि के इस श्लोक में केवल एक नक्षत्र ज्येष्ठा के अलावा अन्य सब निषिद्ध नक्षत्र वही है जो गोस्वामी जी ने बताए हैं। मघा के बजाय ज्येष्ठा को अशुभ माना है। अतः मघा को द्रव्य प्रयोग में न अशुभ न शुभ बल्कि मध्यम समझना चाहिए और आवश्यकता में तत्परक तिथि वार शुभ होने पर ही उसे उपयोग में लेना चाहिए।


लेनदेन के लिए वर्जित समय- रविवार, मंगलवार,संक्रांति, दिन वृद्धि योग और हस्त नक्षत्र में यदि ऋण ले तो कभी मुक्त ना हो। बुधवार को द्रव्य अनावश्यक देना नहीं चाहिए।


वस्तु खरीदने के नक्षत्र:- अश्विनी, चित्रा, स्वाती, श्रवण, शतभिषा, रेवती,तथा वारों में बुध रवि सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।


वस्तु बेचने के नक्षत्र:- भरणी, कृतिका, अश्लेषा, विशाखा, तीनो पूर्वा यह 7 नक्षत्र और गुरुवार, सोमवार श्रेष्ठ माने गए हैं।


खरीदने के नक्षत्रों में बेचना और बेचने के नक्षत्र वारादि में खरीदना सुनिश्चित रूप से घाटे का सौदा जानना चाहिए। जो वस्तु, पशु, धन जिस ग्रह के कारकत्व में आता है उसे उससे संबंधित ग्रह के नक्षत्र, वार में युक्तियुक्त विचार कर बेचा या खरीदा जा सकता है।


कौन सी वस्तु किस ग्रह के अधीन है?


सूर्य-माणिक्य, स्वर्ण,पीतल, गुड़,खांड, चना, भूसा,हल्दी, सरसों, मुनक्का, सभी औषधियां, शर्बत, लाल-पीला रंग, रंगीन वस्त्र,सरकारी ऋणपत्र, पशु,वृक्षादि।


चन्द्र-मोती,चन्द्रमणि,सुसंस्कृत(cultured) मोती, चांदी,पारा, दूध,दही,मक्खन,दूध से बने पदार्थ,मछली,सर्वोषधी, फल-फूल,रसदार पदार्थ,सोडा वाटर,बर्फ,शीशा।


मङ्गल- मूंगा,सुर्ख अकीक, सोना, तांबा, गन्ना, गुड,मुनक्का,आसवारिष्ट,किसमिश, छुहारा, लौंग,किराना,गेहूं,चना,मसूर,मोठ,लाल सरसो, सुपारी, हल्दी,धनिया,लाल मिर्च, शराब, चाय, काफी,चमड़ा,लाख,लाल रंग, बारीक लालऊन, बारदाना,धातुपदार्थ,मशीनरी सामान, विभिन्न शेयर्स।


बुध- पन्ना,जबरजद हरा पत्थर,अकीक, विभिन्न रंगों का फिरोजा, ज्वार,बाजरा, गेहूं, जौ,मूंग,मटर, ग्वार, अरहर, काली खेसारी, सौंफ,सर्वरस, सर्वधान्य, हरे उड़द,पीली सरसों, घी, कपास, अलसी(तीसी), एरण्ड(अण्डी), बिनोला(काकड़ा), मूंगफली(सींगदाना),हैसियन, जूट, पाट, सफेद बारदाना, रेशम, टेक्सटाइल, न्यूजप्रिंट कागज, पेपर मिल्स के शेयर्स।


गुरू- पुखराज, सुनहला पत्थर,बुलियान, नमक,जमीन से पैदा होने वाले कंद, मूल, आलू, प्याज, अदरक,आदि सब्जियां, नकली सिल्क, पाट(कुष्टा),रबड़,तंबाकू,बैंक शेयर्स, खरड, जवाहरात, समुद्री पदार्थ, हाइड्रो खाद।


शुक्र- हीरा, वैकांत, ओपल, सफेद गेहूं, चावल, चीनी,अरहर(तुअर), रुई,रेशम,हैशियन, सिल्क,फैंसी सामान, श्रृंगार प्रसाधन की चीजें,अत्तारोंकी दवाएं, टैक्स,टाइल्स, शेयर्स, देसी अंग्रेजी दवाएं।


शनि- नीलम,लाजवर्त,कसौटी,तिलहन,खनिज आदि सर्व तेल,काले तिल, उड़द,तोरिया, काली मिर्च, काला ऊन,काला रंग,बारदाना, काली धारी, भैंस, लोहा, वाहन,जस्ता,टीन, रांगा, सीसा,कांसी,संगमरमर,चमड़ा व चमड़े की चीजें, कोलतार, आयल सेल्स, कोयले की खानों के शेयर्स, कलपुर्जे तथा वाहन आदि।

राहु-केतु- वैदूर्यमणि(लहसुनिया), दुआ(तारामीरा), संगमूसा,गोमेद,फिरोजा, वायरलेस, टेलीफोन, तार, बिजली के सामान, एलुमिनियम आदि मिश्रित धातुऐं दोनों ग्रहों के अधीन हैं।


व्यापारिक अमूल्य चुटकुले-


● यदि कोई वस्तु सामयक भाव को देखते हुए एकदम मन्दी हो जाए तो निश्चय 100 दिन के भीतर उसका भाव बहुत बढ़ जाता है। यदि तेज हो जाए तो उक्त अवधि में काफी मन्दी का झटका लगता है।

● भाव बढ़ने पर विक्रय वाले नक्षत्रों में बेचना तथा भाव घटने पर क्रय वाले नक्षत्रों में खरीदना चाहिए।

● गुरुवार के बने भाव मामूली हेरफेर से अगले गुरुवार को वही होते हैं।

मंगल को तेजी होकर यदि शनिवार को भी तेजी हो तो अगले मंगलवार तक तेजी ही चलती है। यदि शनिवार को मन्दी आ जाए तो तेजी की लाइन रुकी रहेगी ऐसा जाने।

● किसी भी ग्रह के वक्री,अस्त,युतिकाल में जो भाव किसी वस्तु के बने,उससे उल्टा रुख उक्त ग्रह के मार्गी, उदय,या युति छूटने के बाद प्राय: हो जाता है। 

● संक्रांति के पूर्वदिन का भाव संक्रांति के दिन मंदा रहे तो आगे तेजी का रुख एक मास तक चलेगा।यदि तेज रहे तो मास पर्यंत मंदा जाने।

● ग्रह गति अंतर अपने अधीन वस्तुओं को बहुत ही प्रभावित करता है। चालू मार्केट रुख को पलट देता है।सर्वतोभद्र चक्र में जहां जिस स्थान पर ग्रहवेध हो वहां सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।

● यद्यपि बुध ग्रह सबसे छोटा ग्रह है लेकिन व्यापार का कर्ता होने से इसका बहुत तीव्र प्रभाव चालू मार्केट पर पड़ता है। बुध का सूर्य के साथ युति या प्रतियोग होने पर पृथ्वी पर शासन तंत्र व्यापार पर नियंत्रण करने लगता है  या सरकार खुद ही रेट घटाती-बढ़ाती है।शुभ ग्रह योग होने पर महंगाई बढ़ती है तो क्रूर पाप ग्रह संयोगात महंगाई घटती जाती है।

अंतिम कालम में उल्लिखित मेषादि राशि के आधीन वस्तु नाम ग्रह संचार तथा वेधादि के कारण विशेष प्रतिक्रिया हुआ करती है। उत्पाद से विनाश होता है भाव बहुत बढ़ जाते हैं।

मण्डलं नगरं ग्रामो दुर्ग देवालयं पुरम्।

क्रुरैरुभयतो विद्धं विनश्यतिन संशयः।।


अपनी सामर्थ्य और संपत्ति के अनुसार ही व्यापार करना चाहिए। ज्योतिष से लाभ उठाने वालों को योग्य ज्योतिषी द्वारा अपने शुभाशुभ समय का ज्ञान करवा लेना चाहिए। अशुभ समय अर्थात् बुरे दिनों के फेर से कभी-कभी भारी घाटा लग जाता है।भाग्यका कर्ता समय सर्वोपरि है।काल की सत्ता को सभी नमन करते हैं।खोटे ग्रहों के दुष्प्रभाव को विनष्ट करने में धर्म सर्वोपरि है।कहा गया है-

धर्मेणहन्यते व्याधि,धर्मेणहन्यते ग्रहा:।

धर्मेणहन्यते शत्रु,यतो धर्मस्ततो जय।।


राशियों के अधीन वस्तुएं देश तथा स्थान विशेष-


1-मेष- चावल,सर्वधान्य, तृण, तुषधान्य,वस्त्र,घी,मिर्च,युगंधरी,सर्वोषधी, खच्चर,ऊंट।

देश:-इंग्लैंड,जर्मनी,डेनमार्क,पोलैंड,सीरिया।


2-वृष- सर्वरस,चावल,जौ,सर्वधान्य, सर्वधातु, तिल, ऊनी वस्त्र, रत्न, मणि, हीरा।

घोड़े, गाय, भैंस, गर्दभ।

देश:-आयरलैंड,पारस,साइप्रस,अर्ध भाग रूस, और हालैंड।

दिल्ली मध्य प्रदेश तथा केंद्र शासित प्रदेश।


3-मिथुन- ज्वार,बाजरा,कोदों धान्य, तुअर,तेल, लवण, सर्वक्षार रस, सुगंधित द्रव्य, लाख, सोना, रूपा, शेयर्स।

देश:- यूनाइटेड स्टेट्स अमेरिका (यू.एस.ए.) बेल्जियम,इजिप्ट।


4-कर्क-गेहूं आदि धान्य, चावल, गुड़,खांड, चीनी,मजीठ, 

सेलडी,सुण्ठी,कोदों, सरसों,सज्जी, तेल,हींग,सौचरनमक, कपास, रेशमी वस्त्र, घी,सोना,रूपा।

देश:- अफ्रीका,न्यूजीलैंड,हालैंड,स्कॉटलैंड। राजस्थान।


5-सिंह- चना, गुड़, मसूर, उड़द,मूंग, तिल, तेल, धृत, प्रवाल, कंबल,ऊन,अलसी,कांगुनी,रूपा, युगन्धरी।

देश:- फ्रांस,इटली,सिसली,केलिफोर्निया,आल्पस, रोम। मुंबई।


6-कन्या- चावल,कोंदो, लहसुन, सज्जी,चंदन,कपूर,देवदारु,अगर-तगर, कंदमूल,पन्ना,सोना।

देश:- टर्की,स्विट्जरलैंड,वेस्टइंडीज,यूनान,येरुशलम,लासएंजिल्स, पेरिस, बगदाद, पाकिस्तान।


7-तुला- सुपारी,मिर्च, सरसों तेल, राई, हींग, खजूर,मूंग,जौ, चावल, गेहूं, मसूर,मोठ। घोड़ा वाहन।

देश:- इंडो चाइना, ऑस्ट्रिया तिब्बत, चीन, वर्मा,अर्जेंटीना, वियना, लिस्बन और जापान ।पश्चिमोत्तर भारत,कश्मीर,राजस्थान।


8-वृश्चिक- सभी अन्न, चावल, गुड़, हींग,मोठ,गुग्गुल,लाख,कपूर,पारा, हिंगुल। देश:-स्वीडन,ब्राजील,नार्वे,सीरिया,अल्जीरिया,वाशिंगटन,हेलीफैक्स,डोबर,लिवरपूल,न्यूफाउंडलैण्ड, फ्रैंकफर्ट।


9-धनु- चावल, घृत, कंदमूल,तुषधान्य,अनाज, सेचर, सेंधा नमक, श्वेतवस्तु, रस,सुरमा, कपास,लवण।

देश:-अरब,इजरायल,ऑस्ट्रेलिया,हंगरी,स्पेन, मेडागास्कर ।उत्तर प्रदेश।


10-मकर- दाख,खजूर,घृत,अखरोट,चिरौंजी,पिपली, सुपारी,इलायची,मूंग,जायफल,लोहादिस्याह धातु।

देश:-भारत,सीरिया,अफगानिस्तान,बुल्गारिया, मेक्सिको,लिथुनिया।


11-कुम्भ-मद्यादि अर्क, नशेड़ी वस्तुएं,प्रियंगु,मूल, जावित्री,देवदारू,तेल,सर्वधान्य,सर्वधातु,सर्वोषधी,कोंदो।भैंस वाहन। मणि,मोती,नीलम आदि रत्न।

देश:-अर्धाल्प अरब,रूस,अबीसनिया,स्वीडन।


12-मीन- गुड़, खांड,शक्कर,चावल,घृत,नारियल, सुपारी,त्वली,किराना।मणि,मोती।

देश:-पुर्तगाल,सहारा,रेगिस्तान,अलैक्जेंड्रिया। पंजाब,हिमाचल,हरियाणा।


Friday, December 31, 2021

Happy new year 2022 नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

 नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं



vedic vidha और prakrit bhavishya darshan की ओर से आँग्ल नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं
Happy New Year 2022
नववर्ष की शुरुआत लोग नई उम्मीद एवं नए संकल्पों के साथ करना चाहते हैं. सब यही आशा करते हैं कि नया साल सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके दोस्तों, परिवार और प्रियजनों के लिए भी खास हो।

भूल जाओ बीते हुए कल को,
दिल में बसा लो आने वाले पल को,
खुशियां लेकर आयेगा आने वाला कल.
नये साल की ढ़ेरों शुभकामनाएं.
Happy New Year 2022

नई सुबह इतनी
सुहानी हो जाए
आपके दुखों की सारी बातें
पुरानी हो जाएं
दे जाए इतनी खुशियां
ये दिन आपको
कि ख़ुशी भी आपकी
मुस्कुराहट की
दीवानी हो जाएं.
नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं.
Happy New Year 2022



खुल जाए आपकी किस्मत का ताला
हमेशा आप पर मेहरबान रहे ऊपर वाला
यही दुआ करता है आपका ये चाहने वाला
नया साल मुबारक.
Happy New Year 2022

नववर्ष 2022 बस कुछ ही समय में आने वाला है. लोग नए साल के इंतजार में टिकटिकी लगाए हुए हैं. नया साल मतलब मौज मस्ती, पार्टी और धूम धड़ाका।
नए साल का स्वागत लोग धूमधाम के साथ करते हैं।
दुर्भाग्य से इस बार भी पिछले वर्ष की तरह कोरोना का खतरा बरकरार है। एक बार फिर से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए हमारी सरकार ने गाइडलाइन जारी की है।
आप इन गाइडलाइन का पालन करते हुए ही नए साल का जश्न मनाएं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और पार्टी आयोजन करके ज्यादा भीड़ इकट्ठा ना करें। लेकिन नए साल पर शुभकामनाओं के संदेश में कमी नहीं आनी चाहिए। इसलिए आप खुलकर अपने रिश्तेदारों, फैंड्स और फैमली को न्यू ईयर के मैसेज फोटो आदि भेज सकते हैं।

यूट्यूब चैनल पर देखें-:-नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

Thursday, November 25, 2021

जीवन पथ कार्य व्यवसाय life path work business

जीवन पथ कार्य व्यवसाय 
life path work business

इसी क्रम में आज हम ग्रहों से संबंधित कार्य व्यवसाय विषयक जानकारी को आगे बढ़ाते हुए बात करते हैं।
ग्रह जनित संरचना योगानुयोग दृष्टि संबंधी भाव वर्ग संख्या विशेष अनुसार ग्रहों के प्रभाव उत्पादक कार्य विषय का चयन कर व्यक्ति अपना भावी कैरियर-कार्य व्यवसाय का निर्धारण करने में सक्षम बन पाता है और अपने अपने क्षेत्र में कार्य योजना निर्धारित कर जीवन यापन का मार्ग तय कर सकते हैं।

इसमें दशम राज्य भावेश दशमेश एवं दशम भाव पर ग्रह दृष्टि दशम स्थान पर किन ग्रहों का अस्तित्व विशेषकर है यह विचारणीय विषय है दशम स्थान पाप ग्रह अवलोकित दुष्कर कार्य योजना से धनोपार्जन प्रदायक एवं शुभ ग्रह अवलोकन शुभ पुण्यद सुखद कार्य से धनोपार्जन में योगदान प्रदान करता है। कई व्यक्ति अपने क्षेत्र में विपुल धनसंपदा प्राप्त कर के यशस्वी बनते हैं तथापि विशेषकर इस यश संपदा से वंचित ही प्रतीत होते हैं इस विषय हेतु दशम भाव लाभेश लग्नेश पराक्रमेश भाग्येश धनेश की भाव स्थित रचना पर गहनता से विश्लेषण कर विचार विमर्श करना योग्य समाधान सूचक सूत्र भी स्पष्ट है इस संदर्भ प्रकरण में ग्रह जनित कार्य गुणधर्म व्यवसाय पर शास्त्रोक्त एवं स्वानुभवगत सुतथ्य ज्योतिष अनुरागियों हेतु प्रस्तुत हैं।



सूर्य:- पुलिस विभाग, आरक्षी नायक, गुप्तचर, अपराध नियंत्रण निदेशक, विविध खेल खिलाड़ी, सेना-विभिन्न पदों पर नायक, वकालत, औषध निर्माण, विशेष जीवनीय औषध रचना, चिकित्सक, चाय-बागान-चाय काफी उद्योग, ऊनी वस्त्र, स्वर्णकारी, फोटोग्राफर, ठेकेदारी, जंगलात कार्य, भू खनिज कार्य-सर्वेक्षण, वन विभागीय कार्य, राजकीय सेवा-विशेष पदाधिकार, विज्ञान-अनुसंधान-शोध कार्य, पी.एच.डी., अंग्रेजी भाषा, अर्थशास्त्र,शिल्पशास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, भूगर्भ शास्त्र, प्रशासनिक राज्य शासन पद, गवर्नर, मंत्री प्रेसिडेंट,  उच्च अभियंता, निदेशक-शासक, इमारती लकड़ी, टिंबर, फर्नीचर, बिजली कार्य-इलेक्ट्रॉनिक, जवाहरात कार्य, जल संवहन जहाज कार्य तथा लाल वस्तु तांबा धातु सुयोग प्रदायक।

चन्द्र:- सुलेखन, अभिनय-अभिनेता, कवि, साहित्यकार, फिल्म निर्माण, टी.वी. सीरियल कार्य, अनुसंधान सिंचाई विभाग कार्य, कृषि कार्य, मछली उद्योग, जौहरी, जल तरल कार्य पदार्थ, जल सेना विभाग, रंग रसायन, मादक पदार्थ-शराब उद्योग, शरबत, दूध, दही, डीजल-पेट्रोल, वाहन चालक, होटल, रेस्टोरेंट, नित्य उपयोगी खाद्य पदार्थ विक्रय-निर्माण, इत्र-सुगंधी कार्य, मिष्ठान कार्य, स्त्री उपयोगी सामान निर्माण, पशुपालन, डेयरी कार्य, वनस्पतिशास्त्र, पदार्थ विज्ञान, मौसम विज्ञान, नर्स-कंपाउंडर, कागज, शक्कर, घी, मोती, चांदी धातु सुयोग प्रदायक।

मङ्गल:- आलोचक, पत्रकार, संवाददाता, लेखक, गणितज्ञ, इंजीनियर, वैद्य, डॉक्टर, शल्य-सर्जरी चिकित्सक, शौर्य-पुरुषार्थ कार्य, जादूगर, पुलिस अधिकारी-आरक्षी नायक, दार्शनिक, फोटोग्राफी, बेकरी, अग्नि समीप कार्य कारक, बिजली वस्तु क्रय-विक्रय, भूगर्भ खनिज कार्य, भूमि भवन निर्माण-बिल्डर्स, किराया, सूद ब्याज कार्य, मांस विक्रय, आतिश वस्तु पटाखा निर्माण, कृषि कर्म, जमीन जायदाद क्रय-विक्रय, खेल-खिलाड़ी खेल वस्तु प्रसाधन निर्माण, होटल व्यवसाय, तथा गणित-इतिहास-रसायन-इंजीनियर- भूगर्भ खनिज-गृह शास्त्र-भूगोल।
बुध:- परिवहन संचार-यातायात, ऑडिटर, पोस्ट विभाग, कोरियर सेवा, रिसर्च शोध-स्कॉलर, संपादन रिपोर्टर, टाइपिस्ट, कंप्यूटर सेवा, शेयर मार्केट का कार्य, कमीशन एजेंट-दलाल, वकील, बैंक-बीमा, मनोविज्ञान, लेनदेन, धन संपदा  विनियोजक, लेखा अधिकारी, मुद्रक, क्लर्क, स्टेशनरी, राजदूत, अकाउंटेंट, साहित्यकार, प्रोफ़ेसर, प्राचार्य, अध्यापन-कोचिंग क्लासेज, आमोद प्रमोद खेल सामान, प्रकाशन, पर्यटन-यातायात, ट्रैफिक-डिजाइनर, मैनेजमेंट-व्यवस्थापन- मैनेजर, नक्शा नवीस, तंबाकू-घड़ी-टेलीविजन- ब्रोकरशिप-इंजीनियर आदि कार्यधारक।

गुरु:- उपदेशक, आचार्य, मठाधीश, महंत, दार्शनिक, कथावाचक, अध्यापन, कोचिंग क्लास, वकील, न्यायाधीश, कानून वेत्ता, न्यायालय विभागीय कार्य, राजनेता, नायक- लीडरशिप, राजनीतिज्ञ, समाज सेवक, धर्माचार्य-पुजारी, परिवहन-यातायात कार्य, रसायनवेत्ता, टैक्स सलाहकार, टैक्स विभागीय सेवा कार्य, औषध विज्ञाता एवं निर्माता, सुवक्ता, लेन-देन-सूद-ब्याज-किराया आमद, राजदूत, एम.पी., एम.एल.ए.,  प्रशासकीय पद विशेष नायक, नीति निर्णायक, योजना प्रदायक, तथा आर्थिक वित्त नीति रीति व्यवहार समायोजक कार्य, स्वर्ण, फल आयात निर्यात, मोम,शहद, पीले रंग की वस्तु व्यवसाय, सुयोग प्रदायक तथा शोध विषयक पी.एच.डी. उपाधि विभूषित होने का संयोग भी बने।

शुक्र:- राजनीतिज्ञ, निदेशक, सेक्रेटरी, अभिनेता, सरपंच, पटवारी, प्रधान, चित्रकारी, दूरदर्शन, टी.वी.-चलचित्र-सिनेमा, वीडियो फिल्म, फोटोग्राफी, न्यायाधीश, ठेकेदारी, स्वर संगीत शिक्षक, गायक वाद्य यंत्र सामान्य निर्माता-विक्रेता, वस्त्र बुनकर कार्य, डिजाइनर, मुनीम, समाज सेवक, नाट्य कला, अभिनय, फिल्म निर्माण, इनकम टैक्स-सेल टैक्स वकील, पायलट, ड्राइवर, विविध वाहन चालक, सोना-चांदी सराफा कार्य, कवि, विदेशी मुद्रा कार्य, रेडीमेड वस्त्र, वस्त्र व्यवसाय विशेषज्ञ, फल व्यापार, शेयर मार्केट कार्य, सुगंध श्रृंगार वस्तु कार्य क्रय-विक्रय एवं निर्माण-फैंसी प्रसाधन-दूरसंचार सेवा-मोबाइल सर्विस आदि कार्य धारक बनते हैं।

शनि:- भाषाविद, दुभाषिया कार्य, लेखन, समाज सेवा, गाइड, निर्माता, बिल्डर्स, भू-खनिज संपदा कार्य, राजदूत, कैशियर, निदेशक, वकील, रोड निर्माण कार्य, ठेकेदारी, पब्लिक सर्विस कार्य, श्रम विभाग कार्य, जमीन लेनदेन, कृषि यंत्र निर्माण तथा विक्रय, लोहा-वेल्डिंग कार्य,  विविध यंत्र, मशीनरी, रेलवे ठेकेदारी, सप्लायर, मैकेनिकल इंजीनियर, विद्युत विभाग सेवा, बिजली सामान, पंप-मोटर-गैस कार्य, मुद्रण कला, भवन निर्माण, स्वतंत्र एवं शासकीय ठेकेदारी, श्रमिक नेता आदि कार्य, श्रीकार तथा चर्म उद्योग, मुर्गी पालन, पोल्ट्री फार्म, हाथी दांत कार्य, लोहा, कोयला, पेट्रोल-डीजल-चमड़ा, गैस-ईंधन, सीमेंट, लोहा-सरिया तथा रिफाइनरी, नर्सरी, टेलरिंग, हथकरघा-वीविंग बुनाई वस्त्र मिल विषयक कार्य व्यवसाय भी धारक श्रीकार बनते हैं।

राहु-केतु:- छाया ग्रहों का प्रभाव भी जातक के जीवन शैली कार्य रचना उद्योग व्यवसाय पर प्रभावी बनता है इनके मूल प्रभाव अनुसार विमान सेवा, विद्युत, मोबाइल, टेलीफोन, दूरसंचार, शोध-गवेषणा कार्य, प्राणरक्षक विशेष औषध निर्माण करना बनता है। यह राजनीतिज्ञ राजनेता बनाने में भी क्षमता रखता है।विषय निर्धारण चयन में ऊपर बताए गए ग्रहों का दशमेश से संबंध व अन्य भाव स्वामियों से संबंध आदि का विचार करके निर्णय लेना योग्य रहता है तथा सर्जरी-मंत्र- कूटनीति-गुप्त अंग शास्त्र-रतिशास्त्र-कॉमर्स- शिल्प-सर्जरी आदि कार्य व्यवसाय भी धारक रहते हैं राहु केतु भी जिस ग्रह भाव से संबंध शील बने उसका भी प्रभाव स्पष्ट बन पाता है।

पदोन्नति पक्ष सुयोग

शासकीय सेवारत व्यक्ति की यह मनोकामना होती है कि वह पदोन्नति प्राप्त करें और मानक जीवन स्तर प्राप्त करके मान प्रतिष्ठा में अभिवृद्धि ले।
ज्योतिष फलित नियामक के अनुसार यदि जन्मपत्रिका में शुभ एवं प्रभावी ग्रह दशम स्थान भाव एवं दशमेश अथवा सूर्य से संबंध स्थापित करें तो वे शुभ प्रभावी ग्रह जातक के लिए अपनी दशा अंतर्दशा में उन्नति कारक सिद्ध होते हैं। इसी विषयक भाव प्रतिफल स्पष्टता यह भी कि.. 

◆ दशमेश स्वगृही उच्च आदि बली स्थित में केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित होवें।
दशमेश अन्य सुयोग प्रदायक ग्रह के साथ अनुकूल स्थिति में निर्दोष रूप से स्थित हो
◆ लग्नेश लग्नपति दशम भाव अथवा दशमेश के साथ स्वगृही हो या उच्च राशि का हो
स्वराशि उच्च राशि स्थित सूर्य जी पदोन्नति प्रदायक अपनी दशा अंतर्दशा में पदोन्नति प्रदान करता है।
◆ भाग्येश दशमेश की युति अथवा अपनी मित्र उच्च स्वराशि की रचना स्थिति दशा अंतर्दशा में उन्नति प्रदायक।
◆ जन्मपत्रिका में दशम भाव अथवा दशमेश से लग्नेश युति करता हो अथवा पंचम नवम भाव में स्थित हो तो गोचर में लग्नेश के दशम भाव अथवा दशमेश से त्रिकोण भाव में आने पर अनुकूल उन्नति योग बने।
◆ गुरु दशम भाव अथवा दशमेश से युति या त्रिकोण भाव से संबंध स्थापित करता हो तथा बली वर्ग का हो तो गोचर में त्रिकोण स्थित बनने पर भी पदोन्नति योग बनते हैं।

इसे यूट्यूब चैनल पर देखें-जीवन पथ कार्य व्यवसाय

Related topics:-

◆ कुण्डली के द्वादश भाव और उनके विचारणीय विषय Twelfth house of horoscope and their topics to consider

◆ व्रत और उपवास vrat aur upavaas

Thursday, November 11, 2021

कुण्डली के द्वादश भाव और उनके विचारणीय विषय Twelfth house of horoscope and their topics to consider

कुण्डली के द्वादश भाव और उनके विचारणीय विषय

Twelfth house of horoscope and their topics to consider



ज्योतिष के अनुसार जन्मपत्रिका के द्वादश भाव व्यक्ति/जातक के जीवन के संपूर्ण क्षेत्रों की व्याख्या करते हैं।जन्मपत्रिका में सभी बारह भावों का अपना-अपना विशेष कारकत्व होता है।

तो आज हम जानेंगे कि बारह भावों के विचारणीय विषय...

1-प्रथम भाव:-शरीर, वर्ण,आकृति, बुद्धि, लक्षण,यश,मान, गुणत्व, विवेकशक्ति, सुख-दुःख, प्रवास,तेज,जन जीवनीय विवेक,प्रारब्ध योग,जिज्ञासा, मष्तिष्क, स्वभाव, प्रतिष्ठा, आयु,शरीर चिन्ह,व्रण आदि,निद्रा, दादी,स्त्री का दादा।
सूर्य कारक।
मिथुन, कन्या, तुला,कुम्भ बलवान राशि।
भाव संज्ञा-केन्द्र संज्ञक।

2-द्वितीय भाव:-धन,विवेक, दाहिना नेत्र,परिवार, कुटुम्ब, सुख,स्वर विचार,गुणज्ञता, वचन-वाणी,विद्या, भोजन,सौन्दर्य, यात्रा,सुवर्णरत्नादि कोष,लक्षाधिपति तथा विपुल धन-सम्पदा,खान-पान अभिरुचि, आकस्मिक धन लाभ-लाटरी आदि पक्ष।
गुरुकारक, मङ्गल नेष्ट।
भाव पणफर।

3-तृतीय भाव:-बहन-भाई, मूल अभिरुचि, पराक्रम, साहस, हाथ, कान, महत्वाकांक्षा, नौकर,सुख-दुःख, हस्ताक्षर, मित्रता, रहन-सहन,वृत्ति, धैर्य, दत्तक,उद्योग, यश,अपयश, माता-पिता, मरण,खांसी,दमा, औषध ज्ञान।
मङ्गल कारक।पाप ग्रह बली।
भाव संज्ञा-आपोक्लिम, उपचय।

4-चतुर्थ भाव:-विद्या विचार,मातृ सुख-दुःख,पशुपालन, कृषि कर्म,जमीन, जायदाद, नव-निर्माण, मनोवृत्ति, मानसिक सुख-दुःख,गृह सुख,उपभोग, रहन-सहन,हृदय का साहस, जीवनीय उन्नति, कार्य प्रसाधन क्षमता, पूर्वार्जित विविध सुख,ऐश्वर्य, कीर्ति, वाहन सवारी योग।
चन्द्र+बुध कारक, बुध नेष्ट।
भाव संज्ञा-केन्द्र।

5-पंचम भाव:-बुद्धि, सन्तान, विवेक, देवभक्ति, विद्या योग,यांत्रिक विद्या, शास्त्र निपुणता, सट्टा, लॉटरी, राजनीति, प्रतिभा, वाक्पटुता, साहित्य योग,लेखन कुशलता, मन्त्र यन्त्र शक्ति, सन्तान सुख-दुःख, गर्भ धारण शक्ति।
गुरुकारक, गुरु एकमात्र विफल।भावसंज्ञा-त्रिकोण, पणफर।
विशेष प्रेम विवाह।

6-षष्ठ भाव:-रोग,शत्रु, व्यसन,चोट,घाव,सांसर्गिक रोग,मामा का पक्ष, नुकसान, चोरी, भय,हानि,स्वजन विरोध, काका,मामा, कारागार-जेल यातना, कमर,पैर, धोखा, मन:स्ताप,रकम अवरोध-विवाद।
शनि+मङ्गल कारक,शुक्र नेष्ट।
भावसंज्ञा- त्रिक।

7-सप्तम भाव:-पत्नी का रूप,रंग,गुण, स्वभाव, स्त्री सुखादि, लाभ-हानि,व्यापार-व्यवसाय, सुरत, काम कला,व्यभिचार, विवाह, न्यायालय, विवेक, व्यापार, क्रिया+गुप्त रोग विकार,मूत्राशय स्थान, अण्डकोष, साझेदारी, लिङ्ग, योनि,भतीजा पक्ष, गुमा हुआ धनलाभ, मुकदमे, स्वतंत्र कार्य, अर्श रोग।
शुक्र कारक,शनि नेष्ट।
भावसंज्ञा-केन्द्र।

8-अष्टम भाव:-रिश्वत, भूगत द्रव्य,लॉटरी आदि से आकस्मिक धन लाभ, जलयात्रा, ससुराल से लाभ,चिन्ता, शत्रु, रोग,गुप्तरोग विकार,स्त्री लाभ,सर्पादि दंश, आयुष्य, आत्मघात, व्यसन,विदेश यात्रा योग,ऋणत्व, संकट।
शनिकारक।
भाव संज्ञा-त्रिक।

9-नवम भाव:-जलयात्रा, विदेश वायु यात्रा,
धर्म, पाप, पुण्य आदि का विवेक।उदारता, दान, दैविक शक्ति।यंत्र मंत्र साधना, पर्यटन, पौत्र सुख,शील, संतोष, संपन्नता योग,भाग्य विकास, अधिकार, मान,उच्च शिक्षा।
सूर्य+गुरुकारक।
त्रिकोण का सर्व क्षेत्रीय विचार।
भाव संज्ञा-त्रिकोण।

10-दशम भाव:-पिता का रूप, रंग, वृत्ति एवं पात्रता, गुण, स्वभाव, आयु, उत्कर्ष, मान-सम्मान, उच्च पद, राजयोग,सत्ता, अधिकार, नौकरी, स्वतन्त्र व्यापार, धंधा, पिता का सुख, कर्मसिद्धि, मानहानि, जन जीवनीय स्तर, अनुशासन, पदलाभ,राजमान्यता, परीक्षोत्तीर्ण, वैभव,उपजीविका।
मङ्गल योगद, गुरु,सूर्य,बुध, शनि कारक।
भावसंज्ञा-केन्द्र।

11-एकादश भाव:-सम्पूर्ण धनागम, लॉटरी लाभ आदि का विचार, मित्र सुख, भाई, जंवाई,समाज में श्रेष्ठता,वाहन, सवारी का लाभ,सुख,प्रोपर्टी योग,मंगल कृत्य,मशीनरी कार्य,मेलमिलाप क्रिया कुशलता, आकस्मिक लाभ, आभूषण योग।
गुरु कारक।
भाव संज्ञा-पणफर,उपचय।

12-द्वादश भाव-वाम नेत्र,दूर यात्रा का विचार, व्यसन, दुराचरण, कारावास, दण्ड, गुप्त शत्रु,अपव्यय, ऋण, अपघात, कलह,अच्छा-बुरा व्यय विचार, मुकदमा, शत्रुत्व, द्रव्य हानि, अपयश।विदेश यात्रा, स्थान परिवर्तन।
शानिकारक।
भाव संज्ञा-त्रिक, आपोक्लिम।

अब हम भावों के प्रकार  के बारे में जानते हैं-

केन्द्र भाव: वैदिक प्राकृतज्योतिष में केन्द्र भाव को सबसे शुभ भाव माना जाता है। केन्द्र में प्रथम,चतुर्थ,सप्तम और दशम भाव आते हैं। शुभ भाव होने के साथ-साथ केन्द्र भाव जीवन के अधिकांश क्षेत्र को दायरे में लेता है। केन्द्र भाव में आने वाले सभी ग्रह कुंडली में बहुत ही मजबूत माने जाते हैं। इनमें दसवाँ भाव करियर और व्यवसाय का भाव होता है। जबकि सातवां भाव वैवाहिक जीवन को दर्शाता है और चौथा भाव माँ और आनंद का भाव है। वहीं प्रथम भाव व्यक्ति के स्वभाव को बताता है। यदि जातक की जन्मपत्री में केन्द्र भाव मजबूत हैं तो जातक जीवन के विभिन्न क्षेत्र में सफलता अर्जित करेगा।

त्रिकोण भाव: वैदिक प्राकृतज्योतिष में त्रिकोण भाव को भी शुभ माना जाता है। त्रिकोण भाव में आने वाले भाव धर्म भाव कहलाते हैं। इनमें प्रथम, पंचम और नवम भाव आते हैं। प्रथम भाव स्वयं का भाव होता है। वहीं पंचम भाव जातक की कलात्मक शैली को दर्शाता है जबकि नवम भाव सामूहिकता का परिचय देता है।त्रिकोण भाव बहुत ही पुण्य भाव होते हैं केन्द्र भाव से इनका संबंध राज योग को बनाता है। इन्हें केंद्र भाव का सहायक भाव माना जा सकता है। त्रिकोण भाव का संबंध अध्यात्म से है। नवम और पंचम भाव को विष्णु स्थान भी कहा जाता है।

उपचय भाव: कुंडली में तीसरा, छठवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव उपचय भाव कहलाते हैं। ज्योतिष में ऐसा माना जाता है कि ये भाव, भाव के कारकत्व में वृद्धि करते हैं। यदि इन भाव में अशुभ ग्रह मंगल, शनि, राहु और सूर्य विराजमान हों तो जातकों के लिए यह अच्छा माना जाता है। ये ग्रह इन भावों में नकारात्मक प्रभावों को कम करते हैं।

मोक्ष भाव: कुंडली में चतुर्थ, अष्टम और द्वादश भाव को मोक्ष भाव कहा जाता है। इन भावों का संबंध अध्यात्म जीवन से है। मोक्ष की प्राप्ति में इन भावों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

धर्म भाव: कुंडली में प्रथम, पंचम और नवम भाव को धर्म भाव कहते हैं। इन्हें विष्णु और लक्ष्मी जी का स्थान कहा जाता है।

अर्थ भाव: कुंडली में द्वितीय, षष्ठम एवं दशम भाव अर्थ भाव कहलाते हैं। यहाँ अर्थ का संबंध भौतिक और सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए प्रयोग होने वाली पूँजी से है।

काम भाव: कुंडली में तीसरा, सातवां और ग्यारहवां भाव काम भाव कहलाता है। व्यक्ति जीवन के चार पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में तीसरा पुरुषार्थ काम होता है।

दु:स्थान भाव: कुंडली में षष्ठम, अष्टम एवं द्वादश भाव को दुःस्थान भाव कहा जाता है। ये भाव व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, पीड़ा एवं बाधाओं को दर्शाते हैं।

मारक भाव: कुंडली में द्वितीय और सप्तम भाव मारक भाव कहलाते हैं। 

इसे यूट्यूब चैनल पर देखें:-कुण्डली के द्वादश भाव और विचारणीय विषय

Related topics:-

● व्रत और उपवास vrat aur upavaas

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त Mantra theory for suffering peace

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त  Mantra theory for suffering peace संसार की समस्त वस्तुयें अनादि प्रकृति का ही रूप है,और वह...