Saturday, June 11, 2016

त्रिफला

                   त्रिफला

त्रिफला का सेवन आपके शरीर का कायाकल्प कर जीवन भर स्वस्थ आपको स्वस्थ्य रख सकता है ।
आयुर्वेद की इस महान देन त्रिफला से हमारे देश का आम व्यक्ति परिचित है व सभी ने कभी न कभी कब्ज आदि दूर करने के लिए इसका सेवन भी जरुर किया होगा ।

 बहुत कम लोग जानते है इस त्रिफला चूर्ण जिसे आयुर्वेद रसायन भी मानता है से अपने कमजोर शरीर का कायाकल्प किया जा सकता है ।
जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की । क्योंकि त्रिफला का वर्षों तक नियमित सेवन ही आपके शरीर का कायाकल्प कर सकता है ।
सेवन विधि - सुबह हाथ मुंह धोने व कुल्ला आदि करने के बाद खाली पेट ताजे पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें ।
इस नियम का कठोरता से पालन करें ।
यह तो हुई साधारण विधि पर आप कायाकल्प के लिए नियमित इसका इस्तेमाल कर रहे है तो इसे विभिन्न ऋतुओं के अनुसार इसके साथ गुड़, सैंधा नमक आदि विभिन्न वस्तुएं मिलाकर ले ।
हमारे यहाँ वर्ष भर में छ: ऋतुएँ होती है और प्रत्येक ऋतू में दो दो मास ।
१- ग्रीष्म ऋतू - १४ मई से १३ जुलाई तक त्रिफला को गुड़ १/४ भाग मिलाकर सेवन करें ।
२- वर्षा ऋतू - १४ जुलाई से १३ सितम्बर तक इस त्रिदोषनाशक चूर्ण के साथ सैंधा नमक १/४ भाग मिलाकर सेवन करें ।
३- शरद ऋतू - १४ सितम्बर से १३ नवम्बर तक त्रिफला के साथ देशी खांड १/४ भाग मिलाकर सेवन करें ।
४- हेमंत ऋतू - १४ नवम्बर से १३ जनवरी के बीच त्रिफला के साथ सौंठ का चूर्ण १/४ भाग मिलाकर सेवन करें ।
५- शिशिर ऋतू - १४ जनवरी से १३ मार्च के बीच पीपल छोटी का चूर्ण १/४ भाग मिलाकर सेवन करें  ।
६- बसंत ऋतू - १४ मार्च से १३ मई के दौरान इस के साथ शहद मिलाकर सेवन करें ।शहद उतना मिलाएं जितना मिलाने से अवलेह बन जाये ।
इस तरह इसका सेवन करने से एक वर्ष के भीतर शरीर की सुस्ती दूर होगी , दो वर्ष सेवन से सभी रोगों का नाश होगा , तीसरे वर्ष तक सेवन से नेत्रों की ज्योति बढ़ेगी , चार वर्ष तक सेवन से चेहरे का सोंदर्य निखरेगा , पांच वर्ष तक सेवन के बाद बुद्धि का अभूतपूर्व विकास होगा ,छ: वर्ष सेवन के बाद बल बढेगा , सातवें वर्ष में सफ़ेद बाल काले होने शुरू हो जायेंगे और आठ वर्ष सेवन के बाद शरीर युवाशक्ति सा परिपूर्ण लगेगा ।
दो तोला हरड बड़ी मंगावे |तासू दुगुन बहेड़ा लावे ।।
और चतुर्गुण मेरे मीता |ले आंवला परम पुनीता ।।
कूट छान या विधि खाय|ताके रोग सर्व कट जाय ।।
त्रिफला का अनुपात होना चाहिए :- 1:2:3=1(हरद )+2(बहेड़ा )+3(आंवला )
त्रिफला लेने का सही नियम -
*सुबह अगर हम त्रिफला लेते हैं तो उसको हम "पोषक " कहते हैं ।क्योंकि सुबह त्रिफला लेने से त्रिफला शरीर को पोषण देता है जैसे शरीर में vitamine ,iron,calcium,micronutrients की कमी को पूरा करता है एक स्वस्थ व्यक्ति को सुबह त्रिफला खाना चाहिए ।
*सुबह जो त्रिफला खाएं हमेशा गुड के साथ खाएं ।
*रात में जब त्रिफला लेते हैं उसे "रेचक " कहते है क्योंकि रात में त्रिफला लेने से पेट की सफाई (कब्ज इत्यादि )का निवारण होता है।
*रात में त्रिफला हमेशा गर्म दूध के साथ लेना चाहिए ।
नेत्र-प्रक्षलन : एक चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को एक कटोरी पानी में भिगोकर रखें। सुबह कपड़े से छानकर उस पानी से आंखें धो लें। यह प्रयोग आंखों के लिए अत्यंत हितकर है। इससे आंखें स्वच्छ व दृष्टि सूक्ष्म होती है। आंखों की जलन, लालिमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।
- कुल्ला करना : त्रिफला रात को पानी में भिगोकर रखें। सुबह मंजन करने के बाद यह पानी मुंह में भरकर रखें। थोड़ी देर बाद निकाल दें। इससे दांत व मसूड़े वृद्धावस्था तक मजबूत रहते हैं। इससे अरुचि, मुख की दुर्गंध व मुंह के छाले नष्ट होते हैं।
- त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है। त्रिफला के काढ़े से घाव धोने से एलोपैथिक- एंटिसेप्टिक की आवश्यकता नहीं रहती। घाव जल्दी भर जाता है।
- गाय का घी व शहद के मिश्रण (घी अधिक व शहद कम) के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन आंखों के लिए वरदान स्वरूप है।
- संयमित आहार-विहार के साथ इसका नियमित प्रयोग करने से मोतियाबिंद, कांचबिंदु-दृष्टिदोष आदि नेत्र रोग होने की संभावना नहीं होती।
- मूत्र संबंधी सभी विकारों व मधुमेह में यह फायदेमंद है। रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से कब्ज नहीं रहती है।
- मात्रा : 2 से 4 ग्राम चूर्ण दोपहर को भोजन के बाद अथवा रात को गुनगुने पानी के साथ लें।
- त्रिफला का सेवन रेडियोधर्मिता से भी बचाव करता है। प्रयोगों में देखा गया है कि त्रिफला की खुराकों से गामा किरणों के रेडिएशन के प्रभाव से होने वाली अस्वस्थता के लक्षण भी नहीं पाए जाते हैं। इसीलिए त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद का अनमोल उपहार कहा जाता है।
सावधानी : दुर्बल, कृश व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को एवं नए बुखार में इसका सेवन चिकित्सकीय परामर्श से करें।

Sunday, June 5, 2016

वार और उनमे होने वाले कार्य Day and work

रविवार

यह सूर्य देव का वार माना गया है। इस दिन नवीन गृह प्रवेश और सरकारी कार्य करना चाहिए। सोने के आभूषण और तांबे की वस्तुओं का क्रय विक्रय करना चाहिए या इन धातुओं के आभूषण पहनना चाहिए।

सोमवार

नौकरी वालों के लिए पद ग्रहण करने के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। गृह शुभारम्भ, कृषि, लेखन कार्य और दूध, घी व तरल पदार्थों का क्रय विक्रय करना इस दिन फायदेमंद हो सकता है।

मंगलवार

मंगल देव के इस दिन विवाद एवं मुकद्दमे से संबंधित कार्य करने चाहिए। शस्त्र अभ्यास, शौर्य और पराक्रम के कार्य इस दिन करने से उस कार्य में सफलता मिलती है। मेडिकल से संबंधित कार्य और अॅापरेशन इस दिन करने से सफलता मिलती है। बिजली और अग्नि से संबधित कार्य इस दिन करें तो जरूर लाभ मिलेगा। सभी प्रकार की धातुओं का क्रय विक्रय करना चाहिए।

बुधवार

इस दिन यात्रा करना, मध्यस्थता करना, योजना बनाना आदि काम करने चाहिए। लेखन, शेयर मार्केट का काम, व्यापारिक लेखा-जोखा आदि का कार्य करे।

बृहस्पति

बृहस्पति देव के इस दिन यात्रा, धार्मिक कार्य, विद्याध्ययन और बैंक से संबंधित कार्र्य करना चाहिए। इस दिन वस्त्र आभूषण खरीदना, धारण करना और प्रशासनिक कार्य करना शुभ माना गया है।

शुक्रवार

शुक्रवार के दिन गृह प्रवेश, कलात्मक कार्य, कन्या दान, करने का महत्व है। शुक्र देव भौतिक सुखों के स्वामी है। इसलिए इस दिन सुख भोगने के साधनों का उपयोग करें। सौंदर्य प्रसाधन, सुगन्धित पदार्थ, वस्त्र, आभूषण, वाहन आदि खरीदना लाभ दायक होता है।

शनिवार

मकान बनाना, टेक्रीकल काम, गृह प्रवेश, ऑपरेशन आदि काम करने चाहिए। प्लास्टिक , लकड़ी , सीमेंट, तेल, पेट्रोल खरीदना और वाद-विवाद के लिए जाना इस दिन सफलता देने वाला होता है।

रत्न कब और कितना धारण करना चाहिए When and how much should hold gems

सूर्य रत्न, माणिक्य:-15चावल
भर या 5 रत्ती का, स्वर्ण मुद्रिका
में, हस्त नक्षत्र, रवि पुष्य, या
रवि वार को रवि की होरा में ।

चन्द्र रत्न, मोती:- 2रत्ती या 4रत्ती , चांदी या स्वर्ण में,
रोहिणी नक्षत्र या सोमवार को
चन्द्र की होरा में ।

मंगल रत्न, मूंगा:-8रत्ती, स्वर्ण में
अनुराधा नक्षत्र में या मंगल वार
को मंगल की होरा में।

बुध रत्न, पन्ना:- 3रत्ती या 6रत्ती
स्वर्ण या चाँदी में, उत्तरा फाल्गुनी
नक्षत्र में या बुध वार को बुध की
होरा में।

गुरु रत्न:- पुखराज या पुष्प राज
12चावल भर, या 1-1/4 रती
या अधिकतम 9 रत्ती, गुरु पुष्य
नक्षत्र में या गुरु वार गुरु की होरा
में ।

शुक्र रत्न, हीरा, 9, 18, 27 सेंट
का, मृग्शिर नक्षत्र में, चांदी में ,
मध्यमा अंगुली में या शुक्र वार
शुक्र की होरा में ।

शनि रत्न, नीलम:- 3,6, 10 रत्ती
या 11चावल भर, श्रवण नक्षत्र
में,या शनि वार को, शनि की होरा
में।स्वर्ण में,।

राहु रत्न, गोमेद:- 6 रत्ती , उत्तरा
फाल्गुनी नक्षत्र में या बुध वार ,
सायं काल ।

केतु रत्न, लहसनिया:- 6 रत्ती
गुरु पुष्य नक्षत्र में।

रत्न धारण करने से पहले शुद्ध
रेशमी वस्त्र में, एक सप्ताह दाहिनी भुजा में बाँध कर , परीक्षा करे।
प्राय: 2भाव का मारकेश जीवन
के प्रारम्भ में, 7वे भाव का मारकेश, जीवन के अंत में, वह
8 स्थान का मारकेश जीवन के
मध्य में फल देता हे।

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Saturday, June 4, 2016

सुन्दर काण्ड sundarakaand

सुन्दर काण्ड Sundar Kand



श्री गोस्वामी तुलसीदास जी विरचित सुन्दरकाण्ड का नित्यप्रति पाठ करना हर प्रकार से लाभ दायक होता है, इसके अनेक लाभ है .....
सुन्दर कांड का पाठ करने से मनुष्य के सब कष्ट दूर होते हैं तथा मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में खुशियों का संचार होने लगता है।
सुंदरकांड में तीन श्लोक , साठ दोहे और पांच सौ छब्बीस चौपाइयां हैं। वैसे तो सुंदर कांड का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है लेकिन मंगलवार तथा शनिवार के दिन सुन्दर कांड का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।
इस पाठ को हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जला कर करने से अधिक फल प्राप्त होता है, सुन्दरकाण्ड एक ऐसा पाठ है जो की हरप्रकार की बाधा और परेशानियों को खतम कर देने में पूर्णतः समर्थ है.
आजकल के व्यस्तता भरे दिनचर्या में बहुत अधिक समय तक पूजा कर पाना हमेशा संभव नहीं होता, ऐसे में इस पाठ को आप पूरा पढ़ सके तो बहुत अच्छा है पर नहीं पढ़ सकते या समय का आभाव है तो ऐसा करे के इसमें कुल ६० दोहे है, हर दिन १० दोहों का आप पाठ कर ले, ये आप मंगलवार से शुरू कर सकते है जो की रविवार तक खतम हो जायेगा।

जाने ज्योतिष के अनुसार सुन्दरकाण्ड का पाठ According to astrology, the text of Sundar Kand


ज्योतिष के अनुसार भी सुन्दरकाण्ड एक अचूक उपाय है ज्योतिषो के द्वारा उपाय के तौर पर अक्सर बताया जाता है,।
यह उन लोगो के लिए ये विशेष फलदाई होताहै जिनकी जन्म कुंडली में –
मंगल नीच का है, पाप ग्रहों से पीड़ित है, पापग्रहों से युक्त है या उनकी दृष्टि से दूषित हो रहा है, मंगल में अगर बल बहुत कम हो, अगर जातक के शरीर में रक्त विकार हो, अगर आत्मविश्वास की अधिक कमी हो, अगर मंगल बहुत ही क्रूर हो तो भी ये पाठ आपको निश्चित रहत देगा।
अगर लगन में राहू स्थित हो, लगन पर राहू या केतु की दृष्टि हो, लगन शनि या मंगल के दुष्प्रभावो से पीड़ित हो, मंगल अगर वक्री हो गोचर में मंगल के भ्रमण से अगर कोई कष्ट आ रहे हो, शनि की सादे साती या ढैय्या से आपको परेशानी हो रही हो, इत्यादि….. इन सभी योगो में सुन्दरकाण्ड का पाठ अचूक फल दायक माना जाता है…

सुन्दर काण्ड के पाठ करने से लाभ Benefits from reading Sundarakand


सुंदरकांड का पाठ करके हनुमान जी की भक्ति और स्तुति करने से कुछ विशेष लाभ मिल सकते हैं जो इस प्रकार हैं –
● अकारण  किसी काम में आ रही अड़चन या परेशानी दूर हो जाती हैं।
●  सुंदर कांड का पाठ करने या सुनने से मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।
●  जीवन में आ रही अत्यधिक परेशानियाँ कम हो जाती हैं।
●  आत्म-विश्वास की कमी या इच्छा शक्ति में कमी दूर होती है।
●  सुंदरकांड के मंगलाचरण का रोजाना पाठ करने से व्यापार और नौकरी में तरक्की होती है।
●  सुंदर कांड के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करने से धन धान्य में बढ़ोतरी होती है।
●  सुंदर कांड का पाठ करके एक जटा युक्त नारियल अपने ऊपर से सात बार उतार कर हनुमान जी के मंदिर में चढ़ाने से राहू की शांति होती है। इस नारियल पर सरसों या तिल का तेल छिड़क कर चढ़ाने से शनि का प्रकोप शांत होता है।
●  इसका पाठ करने से विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलता है, ये आत्मविश्वासमें बढोतरी करता है और परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मददगार होता है,बुद्धि कुशाग्र होती है, अगर बहुत छोटे बच्चेहै तो उनके माता या पिता उनकेलिए इसका पाठ करे।
● सुन्दर काण्ड का पाठ मन को शांति और सुकून देता है मानसिक परेशानियों और व्याधियो से ये छुटकारा दिलवाने में कारगर है।
●  जिन लोगो को गृह कलेश की समस्या है इस पाठ से उनको विशेष फल मिलते है।
● अगर घर का मुखिया इसका पाठ घर में रोज करता है तो घर का वातावरण अच्छा रहता है।
●  घर में या अपने आप में कोई भी नकारात्मक शक्ति को दूर करने का ये अचूक उपाय है।
●  अगर आप सुनसान जगह पर रहते है और किसी अनहोनी का डर लगा रहता हो तो उस स्थान या घर पर इसका रोज पाठ करने से हर प्रकार की बाधा से मुक्ति मिलती हैऔर आत्मबल बढ़ता है।
●  जिनको बुरे सपने आते हो रात को अनावश्यक डर लगता हो इसके पाठ निश्चित से आराम मिलेगा।
● जो लोग क़र्ज़ से परेशान है उनको ये पाठ शांति भी देता है और क़र्ज़ मुक्ति में सहायक
भी होता है।
●  जिस घर में बच्चे माँ पिता जी के संस्कार को भूल चुके हो, गलत संगत में लग गए हो और माँ पिता जी का अनादर करते हो वहा भी ये पाठ निश्चित लाभकारी होता है।
●  किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक रोग भले क्यों न हो इसका पाठ
लाभकारी होता है।
●  भूत प्रेत की व्याधि भी इस पाठ को करने से स्वतः ही दूर हो जाती है।
●  नौकरी में प्रमोशन में भी ये पाठ विशेष फलदाई होता है।
●  घर का कोई भी सदस्य घर से बाहर हो आपको उसकी कोई जानकारी मिल
पा रही हो या न भी मिल पा रही हो तो भी आप अगर इसका पाठ करते है तो सम्बंधित व्यक्ति की निश्चित ही रक्षा होगी, और आपको चिंता से भी राहत मिलेगी।
और इसके अलावा ऐसे बहुत से लाभ है जो सुन्दरकाण्ड से मिलते हैं अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस करे, जीवन सार्थक बनाये इस पाठ के मदद से हर दिन को नए उत्साह से जिए और परेशानियों से निजात पाए।

सुन्दर काण्ड पाठ की विधि Sundarkand Path ki Vidhi


अपने मन में यह विश्वास रखकर कि जैसे हनुमान जी ने श्रीराम के काज संवारे , वैसे ही हमारे भी संवारेंगे,  सुंदर कांड का पाठ करना चाहिए। सुंदर कांड के पाठ की विधि इस प्रकार है –
●  स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
●  एक चौकी पर हनुमान जी और श्रीराम भगवान की सुंदर फोटो स्थापित करके पुष्प आदि से सजाएँ।
●  गणेश गौरी,वरुण,नवग्रह, शंकर भगवान , श्रीराम भगवान और हनुमान जी का ध्यान करके आवाहन करें।
●  सिन्दूर में चमेली के तेल मिलाकर हनुमान जी को तिलक लगायें,विधिवत पूजन करें।
●  पीपल के सात पत्ते हनुमान जी के चरणों में रखें।
●  घी का दीपक जलाएं। यह दीपक सुन्दर कांड के पूरे समय तक जलना चाहिए।यदि शनिवार को सुन्दर काण्ड का पाठ हो तो चमेली के तेल का भी दीपक जलाएं।
●  फल , गुड़ चना , लड्डू आदि मिठाई का भोग लगायें।
●  गुरूजी और पितरों आदि का ध्यान करके उन्हें प्रणाम करें।
●  सबसे पहले गणेश जी की स्तुति करें।
●  इसके बाद श्रीराम की वंदना करें। फिर सुन्दर कांड का पाठ शुरू करें।
●  पाठ समाप्त होने पर हनुमान जी की आरती की और श्रीरामजी की आरती करें।
●  आवाहन किये गए देवताओं को विदा करें।
●  उपस्थित लोगों को आरती और प्रसाद दें।

सुन्दर काण्ड के नियम
sundarkand ke niyam

सुन्दर काण्ड पाठ के कुछ नियम होते हैं, इन नियमो का पालन अवश्य करना चाहिए। ये नियम इस प्रकार हैं –
● सुंदर कांड का पाठ सुबह या शाम को चार बजे के बाद करें। बारह बजे से चार बजे के बीच ना करें।
●  सुंदर कांड चल रहा हो तब बीच में उठें नहीं तथा अनावश्यक बातचीत ना करें।
●  मांस , मदिरा तथा धूम्रपान गुटका आदि तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें।
●   नाख़ून ना काटें तथा बाल ना कटवाएं।
●  ब्रह्मचर्य का पालन करें।
●  उस दिन चाकू या कैंची आदि धार युक्त चीजें ना खरीदें।
●  इस दिन जेब में एक लाल रंग का रुमाल रखें।

●  सुन्दर कांड के बाद बच्चों को मिठाई बाटें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

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Thursday, June 2, 2016

आपके हस्ताक्षर आपका व्यक्तित्व Your signature is your personality

1. जो लोग हस्ताक्षर में सिर्फ अपना नाम लिखते हैं, सरनेम नहीं लिखते हैं, वे खुद के सिद्धांतों पर काम करने वाले होते हैं। आमतौर पर ऐसे लोग किसी और की सलाह नहीं मानते हैं, ये लोग सुनते सबकी हैं, लेकिन करते करते अपने मन की हैं।
2. जो लोग जल्दी-जल्दी और अस्पष्ट हस्ताक्षर करते हैं, वे जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसे लोग सुखी जीवन नहीं जी पाते हैं। हालांकि, ऐसे लोगों में कामयाब होने की चाहत बहुत अधिक होती है और इसके लिए वे श्रम भी करते हैं। ये लोग किसी को धोखा भी दे सकते हैं। स्वभाव से चतुर होते हैं, इसी वजह से इन्हें कोई धोखा नहीं दे
3. कुछ लोग हस्ताक्षर तोड़-मरोड़ कर या टुकड़े-टुकड़े या अलग-अलग हिस्सों में करते हैं, हस्ताक्षर के शब्द छोटे-छोटे और अस्पष्ट होते हैं जो आसानी से समझ नहीं आते हैं। सामान्यत: ऐसे लोग बहुत ही चालाक होते हैं। ये लोग अपने काम से जुड़े राज किसी के सामने जाहिर नहीं करते हैं। कभी-कभी ये लोग गलत रास्तों पर भी चल देते हैं और किसी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
4. जो लोग कलात्मक और आकर्षक हस्ताक्षर करते हैं, वे रचनात्मक स्वभाव के होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य को कलात्मक ढंग से करना पसंद होता है। ऐसे लोग किसी न किसी कार्य में हुनरमंद होते हैं। इन लोगों के काम करने का तरीका अन्य लोगों से एकदम अलग होता है। ऐसे हस्ताक्षर वाले लोग पेंटर या कलाकार भी हो सकते हैं।
5. कुछ लोग हस्ताक्षर के नीचे दो लाइन खींचते हैं। ऐसे सिग्नेचर करने वाले लोगों में असुरक्षा की भावना अधिक होती है। किसी काम में सफलता मिलेगी या नहीं, इस बात का संदेह सदैव रहता है। पैसा खर्च करने में इन्हें काफी बुरा महसूस होता है अर्थात ये लोग कंजूस भी हो सकते हैं
6. जो लोग हस्ताक्षर करते समय नाम का पहला अक्षर थोड़ा बड़ा और पूरा उपनाम लिखते हैं, वे अद्भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। ईश्वर में आस्था रखने वाले और धार्मिक कार्य करना इनका स्वभाव होता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन भी सुखी होता है।
7. जिन लोगों के सिग्नेचर मध्यम आकार के अक्षर वाले, जैसी उनकी लिखावट है, ठीक वैसे ही हस्ताक्षर हो तो व्यक्ति हर काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करता है। ये लोग हर काम में संतुलन बनाए रखते हैं। दूसरों के सामने बनावटी स्वभाव नहीं रखते हैं। जैसे ये वास्तव में होते हैं, ठीक वैसा ही खुद को प्रदर्शित करते हैं।
8. जो लोग अपने हस्ताक्षर को नीचे से ऊपर की ओर ले जाते हैं, वे आशावादी होते हैं। निराशा का भाव उनके स्वभाव में नहीं होता है। ऐसे लोग भगवान में आस्था रखने वाले होते हैं। इनका उद्देश्य जीवन में ऊपर की ओर बढ़ना होता है। इस प्रकार हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखते हैं।
9. जिन लोगों के हस्ताक्षर ऊपर से नीचे की ओर जाते हैं, वे नकारात्मक विचारों वाले हो सकते हैं। ऐस लोग किसी भी काम में असफलता की बात पहले सोचते हैं।
10. जिन लोगों के हस्ताक्षर एक जैसे लयबद्ध नहीं दिखाई देते हैं, वे मानसिक रूप से अस्थिर होते होते हैं। इन्हें मानसिक कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, इनके विचारों में परिवर्तन होते रहते हैं। ये लोग किसी एक बात पर अडिग नहीं रह सकते हैं।
11. जिन लोगों के हस्ताक्षर सामान्य रूप से कटे हुए दिखाई देते हैं, वे नकारात्मक विचारों वाले होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य में असफलता पहले नजर आती है। इसी वजह से नए काम करने में इन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
12. यदि कोई व्यक्ति हस्ताक्षर के अंत में लंबी लाइन खींचता है तो वह ऊर्जावान होता है। ऐसे लोग दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। किसी भी काम को पूरे मन से करते हैं और सफलता भी प्राप्त करते हैं।
13. जो लोग हस्ताक्षर करते समय अपना मिडिल नेम पहले लिखते हैं, वे अपनी पसंद-नापंसद को अधिक महत्व देते हैं। इसके बाद कार्यों को पूरा करने में लग जाते हैं।
14. जो लोग हस्ताक्षर का पहला अक्षर बड़ा लिखते हैं, वे अद्भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग किसी भी कार्य को अपने अलग ही अंदाज से पूरा करते हैं। अपने कार्य में पारंगत होते हैं। पहला अक्षर बड़ा बनाने के बाद अन्य अक्षर छोटे-छोटे और सुंदर दिखाई देते हों तो व्यक्ति धीरे-धीरे किसी खास मुकाम पर पहुंच जाता है। ऐसे लोगों को जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त हो जाती हैं

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त

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