Saturday, April 23, 2016

Astrology calculation for investment निवेश के लिए ज्योतिष गणना

ये गणित(calculation) आपको बताएगी की आपको अपना पैसा कहा लगाना है ...?
This mathematical calculation will tell you that you have to add your money ...?

निचे दिए गए अंको में से कोई भी एक अंक चुने।

1 - 2 - 3 - 4 - 5 - 6 - 7 - 8 - 9.

अब 3 से गुणा करे

अब उस अंक में 3 को जोड़े

अब फिर 3 से गुना करे

आपको 2 Digit का अंक मिलेगा।

दोनों अंको को जोड़े  अब ये नंबर आप को बतायेगे की आपको कहा निवेश करना है ।

1. जमीन
2. सोना
3. F.D.
4. Business
5. Shares
6. P.P.F.
7. R.D.
8. N.S.C.
9. Mere ko de do.
10.mutual fund
11. Company deposit

अगर अब भी ना मानो तो आपकी मर्ज़ी।
कोई और नम्बर,चुन करके फिर से देख लें।

जानिये कहाँ iinvest करें पैसा?

ये गणित(calculation) आपको बताएगी की आपको अपना पैसा कहा लगाना है ...?

निचे दिए गए अंको में से कोई भी एक अंक चुने।

1 - 2 - 3 - 4 - 5 - 6 - 7 - 8 - 9.

अब 3 से गुणा करे

अब उस अंक में 3 को जोड़े

अब फिर 3 से गुना करे

आपको 2 Digit का अंक मिलेगा।

दोनों अंको को जोड़े

अब ये नंबर आप को बतायेगे की आपको कहा निवेश करना है ।

1. जमीन
2. सोना
3. F.D.
4. Business
5. Shares
6. P.P.F.
7. R.D.
8. N.S.C.
9. Mere ko de do.
10.mutual fund
11. Company deposit

अगर अब भी ना मानो तो आपकी मर्ज़ी।
कोई और नम्बर,चुन करके फिर से देख लें।😜

Monday, April 18, 2016

कुम्भपर्व २०१६

वेद मे कहा गया है-चतुरः कुम्भाश्चतुर्धा ददामि।

ब्रह्मा जी कहते हैं-हे मनुष्यों मै तुम्हें ऐहिक तथा आमुष्मिक सुख देने वाले चार कुम्भ पर्वो का निर्माण कर पृथ्वी के चार स्थानों,हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक मे प्रदान करता हूँ।

मेष राशि गते सूर्ये सिंह राशौ  बृहस्पतौ।
उज्जयिन्यां भवेत् कुंभः सदा मुक्ति प्रदायकः।।

अर्थात्-जिस समय सूर्य मेष राशि पर हों और बृहस्पति सिंह राशि मे हों तो उस समय उज्जैन मे कुम्भ योग होता है।उज्जैन यह 'उज्जयिनी' शब्द का अपभ्रंश है।इसका प्राचीन नाम विशाला अथवा अवन्तिका भी है।
उज्जैन मे इस कुम्भ पर्व का स्नान शिप्रा नदी मे होता है।
इसका मुख्य शाही स्नान चैत्र शुक्ल पूर्णिमा,अक्षय तृतीया, और वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को होगा।
               प्रमुख स्नान पर्व
१-चैत्र शुक्ल पर्णिमा शुक्रवार २२/०४/२०१६
२-वैशाख कृष्ण एकादशी मंगलवार ०३/०५/२०१६
३- वैशाख कृष्ण  अमावस्या शुक्रवार ०६/०५/२०१६
४-अक्षय तृतीया सोमवार ०९/०५/२०१६
५-आद्य शंकराचार्य जयन्ती वैशाख शुक्ल पञ्चमी बुधवार ११/०५/२०१६
६-वृष संक्रान्ति शनिवार १४/०५/२०१६
७-वैशाख शुक्ल पूर्णिमा शनिवार २१/०५/२०१६

उपरोक्त पर्वो पर शिप्रा मे स्नान कर महाकाल का दर्शन-पूजन करने का माहात्म्य है।

Sunday, April 10, 2016

पैर किसके छुएं?Whose feet touch

 पैर किसके छुएँ और किसके न छुएँ
क्या है पैर छूने का वैज्ञानिक आधार ?
हिन्दू संस्कृति में पैर छूना एक संस्कार माना जाता है । हम अपने से बड़ो के , माता पिता , और गुरु के पैर छूते है । लेकिन आजकल इसका स्वरुप बिगड़ गया है ।

हमारे शरीर के उत्तरी और दक्षिणी दो ध्रुव होते है । सिर उत्तरी ध्रुव और पैर दक्षिणी ध्रुव होता है । अगर हम किसी के पैर छूते है तो हमारा उत्तरी ध्रुव बड़े आदमी के दक्षिणी ध्रुव से मिल जाता है । ऐसी स्थिति में बड़े आदमी के संस्कार स्वतः चुम्बकीय आधार पर हमारे चित में प्रवेश कर जाते है ।

हमारी हिन्दू संस्कृति के संस्कार कहते है सदाचारी माता पिता, ज्ञानी और उच्च कोटि के गुरु के ही पैर छूने चाहिए ।
अगर आप मांसाहारी के पैर छुओगे तो निश्चित तौर पर आपके संस्कार अपवित्र हो जाएंगे । दुराचारी के यहाँ भोजन करने से संस्कार पापी हो जाते है ।
इसलिये सभी के पैर छूने से बचना चाहिये।

Monday, April 4, 2016

कितने प्रकार के विवाह होते हैं?How many types of marriages occur?

हमारे यहाँ विवाह के कई भेद हैं, जिन्हें आठ श्रेणियों में बताया गया है यथा:-
1. ब्रह्म विवाह
दोनो पक्ष की सहमति से समान वर्ग के सुयोज्ञ वर से कन्या का विवाह निश्चित कर देना 'ब्रह्म विवाह' कहलाता है। सामान्यतः इस विवाह के बाद कन्या को आभूषणयुक्त करके विदा किया जाता है। आज का "Arranged Marriage" 'ब्रह्म विवाह' का ही रूप है।

2. दैव विवाह
किसी सेवा कार्य (विशेषतः धार्मिक अनुष्टान) के मूल्य के रूप अपनी कन्या को दान में दे देना 'दैव विवाह' कहलाता है।

3. आर्श विवाह
कन्या-पक्ष वालों को कन्या का मूल्य दे कर (सामान्यतः गौदान करके) कन्या से विवाह कर लेना 'अर्श विवाह' कहलाता है।

4. प्रजापत्य विवाह
कन्या की सहमति के बिना उसका विवाह अभिजात्य वर्ग के वर से कर देना 'प्रजापत्य विवाह' कहलाता है।

5. गंधर्व विवाह
परिवार वालों की सहमति के बिना वर और कन्या का बिना किसी रीति-रिवाज के आपस में विवाह कर लेना 'गंधर्व विवाह' कहलाता है।

6. असुर विवाह
कन्या को खरीद कर (आर्थिक रूप से) विवाह कर लेना 'असुर विवाह' कहलाता है।

7. राक्षस विवाह
कन्या की सहमति के बिना उसका अपहरण करके जबरदस्ती विवाह कर लेना 'राक्षस विवाह' कहलाता है।

8. पैशाच विवाह
कन्या की मदहोशी (गहन निद्रा, मानसिक दुर्बलता आदि) का लाभ उठा कर उससे शारीरिक सम्बंध बना लेना और उससे विवाह करना 'पैशाच विवाह' कहलाता है।

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त Mantra theory for suffering peace

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त  Mantra theory for suffering peace संसार की समस्त वस्तुयें अनादि प्रकृति का ही रूप है,और वह...