Monday, May 18, 2026

पुरुषोत्तम मास : भक्ति, पुण्य और आत्मशुद्धि का दिव्य अवसर purushottam mas

पुरुषोत्तम मास : भक्ति, पुण्य और आत्मशुद्धि का दिव्य अवसर 



सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व बताया गया है। इसे अधिक मास,मलमास भी कहा जाता है। यह मास भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी होता है। मान्यता है कि इस पवित्र मास में किए गए जप, तप, दान, पूजा और सेवा का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।
पुराणों के अनुसार जब अन्य महीनों ने इस अतिरिक्त मास को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर “पुरुषोत्तम मास” का सम्मान प्रदान किया। तभी से यह माह विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।


पुरुषोत्तम मास का महत्व

पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का अवसर भी है।
इस महीने में व्यक्ति अपने जीवन के दोषों को दूर कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है।

इस पावन मास में —
✅ पापों का क्षय होता है।
✅ मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
✅ परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
✅ भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


पुरुषोत्तम मास में क्या करना चाहिए 

1️⃣ भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण की पूजा करें

प्रतिदिन भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या श्रीराम का पूजन करें। तुलसी अर्पित करें और दीप जलाएं।

2️⃣ मंत्र जाप करें

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का नियमित जाप अत्यंत शुभ माना गया है।

3️⃣ धार्मिक ग्रंथों का पाठ

गीता, विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत कथा एवं रामचरितमानस का पाठ करें या सुनें।

4️⃣ दान-पुण्य करें

अन्नदान, 

वस्त्रदान, 

गौसेवा, 

जलसेवा एवं 

दीपदान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

5️⃣ व्रत एवं सात्विक जीवन अपनाएं

इस माह में सात्विक भोजन करें और मन, वचन एवं कर्म की शुद्धता बनाए रखें।

6️⃣ सेवा एवं सत्संग करें

जरूरतमंदों की सहायता करें और भजन-कीर्तन एवं सत्संग में भाग लें।


पुरुषोत्तम मास में क्या नहीं करना चाहिए 

❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन का सेवन न करें।
❌ क्रोध, झूठ, चुगली एवं अपशब्दों से बचें।
❌ किसी का अपमान या दिल दुखाने वाले कार्य न करें।
❌ लोभ, अहंकार एवं अनैतिक कार्यों से दूर रहें।
❌ व्यर्थ विवाद और नकारात्मक विचारों से बचें।
❌ आलस्य एवं समय की बर्बादी न करें।


पुरुषोत्तम मास का आध्यात्मिक संदेश

यह मास हमें सिखाता है कि जीवन में भक्ति, सेवा, संयम और सदाचार का कितना महत्व है।
यदि व्यक्ति इस माह में श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान की आराधना करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आते हैं।

“हरि स्मरण, हरि आराधन — पुरुषोत्तम मास में जीवन बने पावन।” 




प्राकृत भविष्य दर्शन ज्योतिष एवं अनुष्ठान केन्द्र, कानपुर

🔹 जन्म कुंडली विश्लेषण
🔹 वास्तु परामर्श
🔹 वैदिक पूजा एवं अनुष्ठान
🔹 ग्रह शांति एवं विशेष उपाय

📞 मोबाइल: 08574763197
📍 पता: योगेन्द्र विहार खाड़ेपुर, नौबस्ता कानपुर नगर-21

ज्योतिष मार्गदर्शन • अनुष्ठान सेवा • समाधान आपका, संकल्प हमारा ।

Releted topic:-

माँ कात्यायनी देवी ma katyayani devi


अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) क्यों लगता है? जानिए इसका ज्योतिषीय एवं धार्मिक रहस्य Why does an extra month (Purushottam month) occur? Learn its astrological and religious secrets.

No comments:

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त Mantra theory for suffering peace

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त  Mantra theory for suffering peace संसार की समस्त वस्तुयें अनादि प्रकृति का ही रूप है,और वह...