Tuesday, February 14, 2017

कलीमिर्च के अद्भुत प्रयोग Wonderful use of lime

काली मिर्च से जहां स्वास्थ्य तो सही रहता ही है वहीं कई तरह की बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं काली मिर्च के ऐसे ही कुछ उपाय जिनसे आपका भाग्य बदल जाएगा:-

(1) ज्योतिष के अनुसार काली मिर्च को शनि ग्रह की कारक वस्तु माना गया है। शनि की साढ़े साती या ढैय्या की स्थिति में काले कपड़े में थोड़ी सी काली मिर्च और कुछ पैसे दान करना चाहिए। इससे शनि का प्रकोप तुरंत ही शांत होगा।
(2) अगर आप किसी भी तरह से शनि दोष से पीड़ित है तो भोजन करते समय कभी भी उपर से नमक या मिर्च नहीं लें वरन काला नमक और काली मिर्च का ही प्रयोग करें। इससे शनि का बुरा असर खत्म होगा।
3) अगर आपका काम बार-बार बिगड़ रहा हो तो इसके लिए भी एक बहुत ही आसान सा उपाय है। घर से बाहर निकलते समय मुख्य द्वार पर काली मिर्च रखें और जाते समय इस पर पैर रख कर निकलें, आपका हर कार्य पूरा होगा। परन्तु ध्यान रखें कि काली मिर्च पर पैर रखने के बाद वापिस घर में नहीं आना है अन्यथा इसका उल्टा असर भी हो सकता है।

(4) अगर आप काफी सारा धन कमाना चाहते हैं परन्तु परिस्थितियों तथा भाग्य के चलते नहीं कमा पा रहे हैं तो यह उपाय आपके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है। आपको सिर्फ इतना सा करना है कि शुक्ल पक्ष (चांदनी पक्ष) में काली मिर्च के पांच दाने लेकर अपने सिर पर से 7 बार उसार लें। इसके बाद किसी सुनसान चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में एक-एक दाना फेंक दे तथा पांचवे बचे काली मिर्च के दाने को आसमान की तरफ फेंक दें और बिना पीछे देखे या किसी से बात घर वापिस आ जाए। आपको जल्दी ही पैसा मिलेगा।
(5) काली मिर्च के 7-8 दाने लेकर उसे घर के किसी कोने में दिए में रखकर जला दें। घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाएगी।
(6) 5 ग्राम हींग, 5 ग्राम कपूर तथा 5 ग्राम काली मिर्च को मिलाकर पाउडर बना लें और फिर उस चूर्ण की राई के दाने बराबर गोलियां बना लें। अब इन गोलियों को दो बराबर हिस्सों में बांद दें। एक हिस्से को सुबह और दूसरे हिस्से को शाम के समय घर में जलाएं। इस तरह लगातार तीन दिनों तक करने में घर को लगी बुरी नजर उतर जाती है और घर में किसी तरह की कोई बुरी शक्ति होती है तो वह भी चली जाती है।

Wednesday, February 8, 2017

अनैतिकता Immorality

अनैतिकता तो आज आम बात हो गई है। ठगी, विश्वासघात, वचनभंग, खुदगर्जी, बेमुरव्वती, अहंकार, परपीड़न, कर्तव्य त्याग आदि बुराइयाँ बेतरह बढ़ रही हैं। सरकारी कर्मचारी, व्यापारी, धर्म प्रचारक, नेता, मजदूर आदि सभी वर्गों में इस प्रकार की दूषित मनोवृत्ति बढ़ रही है। अविश्वास, असंतोष और आशंका से हर एक का मन भारी हो रहा है। इस स्थिति को कानून, पुलिस, फौज या सरकार नहीं सुधार सकती। जब अन्तरात्मा में ईश्वरीय वाणी जागृत होकर धर्म भावना, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी, त्याग, प्रेम, और सेवा की भावना पैदा होगी, तभी व्यापक अनैतिकता की दुखदायक स्थिति का अन्त होगा और इसके लिए प्रत्येक  को अपने स्तर पर स्वयं प्रयास करना होगा। प्रत्येक का स्वत: के लिए किया गया यह प्रयास उसके अद्यात्मिक स्तर को तो उन्नत करेगा ही किन्तु परोक्ष रूप से देश को विश्व में स्थापित करने में भी योगदान देगा।
आओ कुछ ऐसी खोज करें जिससे अपना व राष्ट्र का सहयोग हो।

घर की शान्ति के के लिए कुछ आवस्यक बाते Some need for home consoles

घर की शान्ति के के लिए कुछ आवस्यक बाते।

1 ज्यादा चिल्लाना नहीं चाहिए
2 जानवरो और नोकरो से प्रेम पूर्वक बर्ताव करना चाहिए
3 अपने साथियो से भी अच्छा बर्ताव करना चाहिए।
4 अपनी गलती स्वीकार करना चाहिए।
5 किसी को दबाने की कोशिस नहीं करना चाहिए।
6 एक दूसरे की बुराई नहीं करना चाहिए।
7 सवकी भावनाओ की कदर करनी चाहिए।
8 ज़रा ज़रा सी बातो पर ध्यान नहीं देना
9 सबको उचित प्रेम देना किसी को सूना ना लगे।
10 सबकी योग्यता और प्रतिभा को प्रोत्साहन देना।
11 गुस्से में जवाव नहीं देना
12 एक दूसरे को सहयोग करना
13 क्रोध में किसी की गलती को ना बताना प्रेम से बोलना
14 पुरानी बाते नहीं उखाड़ना
15 आज का झगड़ा कल तक नहीं चलाना
16 क्रोध मन में रखकर नहीं सोना
17 गलतफहमी नहीं पालना
18 आपस में एक दूसरे का उपकार मानना
19 क्षमा करने की और भुलने की क्षमता रखना
20 कभी तनाव नहीं रखना
21 आपसी झगडे का लाभ दूसरे ना उठाये इसका ध्यान रखना
22 अपनी मर्यादा का ध्यान रखना
23 हमेशा एकता बनाये रखना
24 सेवक को नहीं खुद को सुधारने का प्रयास करना
25 किसी को ज्यादा डाटना नहीं।
26 मनुष्य जन्म को सफल बनाने का प्रयास करना
27 रोज़ कम से कम दस मिनट अपनी आत्मा का चिंतन ज़रूर करना
28 मिथ्या मान्यताओं को नष्ट करने का पुरुषार्थ करना
29 मरने से पहले सम्यग्दर्शन (सही मान्यता) को प्राप्त करने का पुरुषार्थ करना
30 अंत में अपनी आत्मा में लीन होकर मोक्ष महल में प्रवेश करना और अनंत काल के लिए सुखी होना,भक्त से भगवान बनना पामर से परमात्मा बनना खुद से खुदा बनना और इस मानव जीवन को सफल करना, विचारना...

घर मे परेशानी आने के कुछ संकेत Some signs of trouble at home

घर मे परेशानी आने के कुछ संकेत-

जिनको जानना हर इंसान के लिये जरुरी है-

1. अकस्मात घर की चलती हुई घड़ियां बंद हो जाएं तो समझ लीजिए कि आपके बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं।
2. घर की छत पर चिड़ियां कबूतर आदि पक्षी मरे हुए मिलें तो समझ लीजिए कि आपके बच्चों की तबियत बिगड़ सकती है।
3. घर की दीवारों पर अगर सीलन आने लगे तो समझ लीजिए कि आपके मन की शांति छीनने वाली है।
4. घर में पड़े हुए नमकीन पदार्थों में अगर चींटीयां पड़ जाएं तो समझ लीजिए कि आपके व्यवसाय या नौकरी में दिक्कत आने वाली है।
5. सड़क का कुत्ता घर की तरफ मुंह करके रोने लगे तो समझ लीजिए कि दुर्घटना होने के संकेत हैं।
6. तेल के जार में से तेल गर फर्श पर पानी की तरह बह जाए तो समझ लीजिए कि लाभ के रास्ते रुक जाएंगे।
7. घर में से सोने के आभूषण गायब या चोरी हो जाए तो बड़ी धन हानी की ओर इशारा है।
8. घर मे लगा हुआ तुलसी का पौधा जल जाए अथवा अकारण सूख जाए तो ये संकेत हैं की कुछ अशुभ होगा।
9. दूध बार-बार उफान करके बहे तो समझ लीजिए के कोई बहुत ज़्यादा बीमार पड़ने वाला है।
10. घर में शादीशुदा बहन, बेटी, बुआ, साली, मौसी अगर बिन बुलाए ठहरने हेतु आ जाए तो समझ लीजिए के दुर्भाग्य दस्तक दे रहा है।
11. सरकारी कागज़ात जैसे की बिल्स, रजिस्ट्री में दीमक लग जाए अथवा गुम हो तो सरकार द्वारा दंडित होने के संकेत हैं।
12. बार-बार कपड़ो का जलना अथवा फट जाना आपकी सामाजिक बदनामी और फज़ीहत की ओर संकेत देता है।
13. कांच अथवा चीनी-मिट्टी के बर्तनों में दरार आना होस्पिटल के बिल बढ़ने के संकेत देता है।
मंगलागौरी व्रत mangalaagauree vrat

Tuesday, November 1, 2016

लक्ष्मी lakshmee

लक्ष्मी lakshmee


दीपावली के दिन जो पूजा होती है उसे लक्ष्मी पूजन कहा जाता है। आज ज्यादातर लोग समझते हैं कि लक्ष्मी का अर्थ है धन की देवी। ये लक्ष्मी शब्द का बहुत संकुचित अर्थ हो गया। वास्तव में इस शब्द का अर्थ बहुत विशाल है। लक्ष्मी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की लक्ष धातु से हुई है। लक्ष का शाब्दिक अर्थ है ध्यान लगाना, ध्येय बनाना, ध्यानपूर्वक निरीक्षण करना इत्यादि। इसका अर्थ ये है कि जब हम एकाग्रचित्त होकर कोई कार्य या साधना करते हैं तो उसका जो फल प्राप्त होता है उसे लक्ष्मी कहते हैं। हमारे प्राचीन ॠषियों का प्रत्येक कार्य तप, ध्यान इत्यादि का उद्देश्य हमेशा शुभ एवं आध्यात्मिक समृद्धि के लिए होता था। तब लक्ष्मी का अर्थ जीवन के चार आयामों धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष के समन्वय से जीवन को दिव्यता के मार्ग पर ले जाना था। हमारी सबसे प्राचीन पुस्तक ॠग्वेद में भी लक्ष्मी देवी का उल्लेख आता है परंतु वहां लक्ष्मी का अर्थ धन की देवी नहीं, शुभता एवं सौभाग्य की देवी है। धन की उपयोगिता सीमित है। इस संसार में आप धन से सब कुछ नहीं प्राप्त कर सकते। न धन से  आप माता-पिता खरीद सकते हैं, न दोस्त, न ज्ञान। ऐसा बहुत कुछ है जो धन से नहीं खरीदा जा सकता। परंतु सौभाग्य से आप जो चाहें वो प्राप्त कर सकते हैं। अथर्ववेद में भी लक्ष्मी को शुभता, सौभाग्य, संपत्ति, समृद्धि, सफलता एवं सुख का समन्वय बताया गया है। पुराणों में लक्ष्मी के आठ प्रकार बताए गए हैं जिन्हें अष्ट लक्ष्मी के नाम से संबोधित किया गया है। ये हैं आदिलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, एवं धनलक्ष्मी। इससे स्पष्ट होता है कि लक्ष्मी का प्रभाव क्षेत्र केवल धन तक ही सीमित नहीं है। लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय मानी गई है। विभिन्न देवताओं की भिन्न-भिन्न शक्तियों का मूल स्त्रोत भी माता लक्ष्मी ही हैं। पुराणों के अनुसार माता लक्ष्मी ने अग्निदेव को अन्न का वरदान दिया, वरूण देव को विशाल साम्राज्य का, सरस्वती को पोषण का, इन्द्र को बल का, बृहस्पति को पांडित्य का इत्यादि-इत्यादि। इससे सिद्ध होता है कि माता लक्ष्मी की कृपा जिसपर भी हो जाए उसे नाना प्रकार के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। माता लक्ष्मी के हाथ में कमल है। शास्त्रों में कमल को ज्ञान, आत्म साक्षात्कार एवं मुक्ति का प्रतीक माना गया है। हमारा दर्शन हमें जलकमलवत् रहने की शिक्षा देता है। इसका अर्थ है कि समस्त ऐश्वर्य के बीच रहते हुए भी मन को निर्लिप्त रखना। माता के दोनों ओर दो गज शक्ति का प्रतिक हैं। माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू है जो अँधेरे में भली-भाँति देखने में सक्षम है। इसका अर्थ है कि जब चहुँ ओर दुख का अँधकार छाया हो तो माता की कृपा से हम हमारी दृष्टि सम्यक रहती है एवं हम अपना मार्ग सरलता से ढूँढ सकते हैं। माता लक्ष्मी के हाथ से हमेशा धनवर्षा होती रहती है जो इस बात की सूचक है कि हमें केवल धन का संग्रह ही करना है परंतु वंचितों को उनकी आवश्यकतानुसार दान भी करना है। माता लक्ष्मी ने भगवान् विष्णु को पति रूप में वरण किया है जो सर्वश्रेष्ठ हैं। माता सदा उनके चरणों में रहती हैं। यह इस बात का द्योतक है कि धन आदि ऐश्वर्य सदा उत्तम पुरूषों के पास ही टिकता है। अधम पुरूषों को इसकी प्राप्ति नहीं होती यदि संयोगवश प्राप्ति हो भी जाए तो वो टिकती नहीं है। कलियुग में लक्ष्मी का वास नारी में कहा गया है। इसीलिए कन्या के जन्म पर कहा जाता है कि लक्ष्मी जी पधारी हैं परंतु विद्वानों का ये भी कहना है कि यदि हम कन्या के अवतरण पर निराश हो जाते हैं तो लक्ष्मी उल्टे पाँव लौट जाती है। जिस घर में नारी का आदर होता है वहाँ माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है एवं जहां नारी का अनादर होता है वहाँ से लक्ष्मी का पलायन हो जाता है। माता लक्ष्मी की कृपादृष्टि हेतु समस्त नारी जाति का सम्मान करना अत्यावश्यक है। चूंकि माता लक्ष्मी समस्त प्रकार के ऐश्वर्य की प्रदात्री हैं इसलिए माता लक्ष्मी को केवल धन की देवी मानने की भूल न करें।अतः लक्ष्मी पूजन के अवसर पर हम सबको माता लक्ष्मी से प्रार्थना करनी चाहिये कि वो अपने अष्ट रूपों में हमारे गृह में विराजमान हों और हमें सन्मार्ग पर चलने का आशीर्वाद दें।
मंगलमय शुभकामनाओं  सहित
आपका विजय कुमार शुक्ल

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