Friday, September 23, 2016

श्री विश्वकर्मा आरती shree Vishwakarma Aarti

श्री विश्वकर्मा आरती

प्राकृत भविष्य दर्शन ज्योतिष एवं अनुष्ठान केन्द्र कानपुर


ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥


आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥


ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥3॥


रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥4॥


जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥5॥


एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥6॥


ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥7॥


श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥8॥


आरती के बाद प्रार्थना


हे देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा!
हमें शुद्ध बुद्धि, उत्तम कौशल और सद्कर्म की प्रेरणा प्रदान करें।


हमारे कार्य-साधनों की रक्षा करें तथा हमारे कर्म को लोकहितकारी बनाने की शक्ति दें।


हमारे उद्योग, व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में धर्म, गुणवत्ता, अनुशासन एवं समृद्धि प्रदान करें।


॥ ॐ विश्वकर्मणे नमः ॥

Releted topic -


गणेश महोत्सव : शास्त्र, कथा, परम्परा और विसर्जन का वास्तविक रहस्य Ganesh Mahotsav: Scripture, story, tradition and real mystery of immersion

No comments:

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त Mantra theory for suffering peace

कष्ट शान्ति के लिये मन्त्र सिद्धान्त  Mantra theory for suffering peace संसार की समस्त वस्तुयें अनादि प्रकृति का ही रूप है,और वह...