प्रश्न-विचार : प्रश्न के सत्य, समय और फल जानने की सरल विधियाँ
ज्योतिष एवं प्रश्न-शास्त्र में कभी-कभी सामने वाला व्यक्ति वास्तविक समस्या लेकर प्रश्न करता है, तो कभी केवल परीक्षण के लिए प्रश्न करता है—अर्थात् यह देखने के लिए कि प्रश्नकर्ता के मन की बात या प्रश्न की वास्तविकता को समझा जा सकता है या नहीं।
ऐसी स्थिति में प्रश्न के आधार पर कुछ पारंपरिक अंक एवं प्रश्न-विचार सूत्रों का प्रयोग किया जा सकता है। नीचे दिए गए सूत्रों को क्रमबद्ध और सरल रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
---
१. प्रश्न सत्य है या असत्य?
सूत्र
वार + योग + नक्षत्र × तिथि + 4 ÷ 3 = शेष
यहाँ वार, योग और नक्षत्र की क्रम संख्या लेकर, तिथि के साथ निर्धारित विधि से गणना की जाती है और अंत में 3 से भाग देकर शेष देखा जाता है।
फल-विचार
शेष फल
1 प्रश्न/बात सत्य मानी जाए
2 प्रश्न/बात झूठी मानी जाए
0 बात अधूरी या मिश्रित है—पहला भाग सत्य, बाद का असत्य हो सकता है
पारंपरिक सूत्र
> वार, योग, नक्षत्र मिलावो।
तिथि से गुनि पुनि चार मिलावो।।
भाग तीन का तब देहु।
मिथ्या-सत्य विचार कहेउ।।
एक बचे सच बात मान लो।
दो से बिल्कुल झूठ जान लो।।
शून्य बचे तो पहिले सच्ची।
पीछे झूठी सो अब कच्ची।।
नोट: गणना करते समय वार, योग और नक्षत्र की संख्या किस क्रम-पद्धति से ली जा रही है, उसे पहले निश्चित कर लेना चाहिए।
---
२. वर्षा कब होगी?
यदि प्रश्न हो—“वृष्टि कब होगी?” तो वर्तमान नक्षत्र के आधार पर यह सरल प्रश्न-विचार किया जाता है।
सूत्र
वर्तमान नक्षत्र की संख्या × 2 ÷ 3 = शेष
फल
शेष फल
1 तत्काल अथवा शीघ्र वर्षा
2 कुछ समय बाद वर्षा
0 वर्षा नहीं होगी
यह सूत्र तत्कालीन प्रश्न-विचार के लिए है; वास्तविक मौसम-विज्ञान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
---
३. इससे धन मिलेगा या नहीं?
जब प्रश्नकर्ता किसी व्यक्ति, कार्य, व्यापार या अन्य माध्यम के संबंध में पूछे—
“क्या इससे मुझे धन प्राप्त होगा?”
तब जिस व्यक्ति/विषय के नाम से विचार करना हो, उसके नामाक्षर को आधार बनाया जाता है।
सूत्र
प्रभु/विषय के नामाक्षर को तीन गुना करें → प्रश्नकर्ता के नामाक्षर को उसमें जोड़ें → प्राप्त संख्या को 3 से भाग दें।
फल
शेष फल
1 धन प्राप्ति का संकेत
2 धन प्राप्ति नहीं—अल्प अथवा नगण्य लाभ
0 विशेष फल प्राप्ति के लिए अन्य प्रश्न-विचार आवश्यक
पारंपरिक पंक्तियाँ
> प्रभु नामाक्षर तिगुण करि, निज नामाक्षर फेर।
तिन भाग दे जानु, धन बहुत मिलो या थोर।।
एक बचे धन प्राप्ति बतावे,
दुई दमड़ी नहीं भेंट करावे।।
---
४. कार्य कब होगा?
किसी कार्य के संबंध में प्रश्न हो—
“मेरा यह कार्य कब तक पूरा होगा?”
तो प्रश्न के दिन की तिथि, वार और नक्षत्र की संख्या ली जाती है।
गणना-विधि
1. तिथि + वार + नक्षत्र की संख्या जोड़ें।
2. प्राप्त संख्या को 3 से गुणा करें।
3. उसमें 6 जोड़ें।
4. प्राप्त संख्या को 9 से भाग दें।
5. प्राप्त शेष के अनुसार कार्य-सिद्धि का समय निर्धारित करें।
शेषानुसार समय
शेष कार्य होने का समय
1 एक पक्ष में
2 एक मास में
3 एक ऋतु में
4 लगभग छह माह में
5 एक दिन में
6 एक रात में
7 लगभग तीन घंटे अथवा एक प्रहर में
8 यथासमय/तत्काल
0 शीघ्र कार्य-सिद्धि
उदाहरण
प्रश्न: 22 जून 2025 को किसी व्यक्ति ने पूछा—“मेरा अमुक कार्य कब तक होगा?”
उस दिन:
द्वादशी = 12
रविवार = 1
भरणी नक्षत्र = 2
अतः—
12 + 1 + 2 = 15
अब,
15 × 3 = 45
45 + 6 = 51
51 ÷ 9 = 5 शेष 6
अतः शेष 6 प्राप्त हुआ।
फल — कार्य एक रात में होने का संकेत।
---
५. अंक प्रश्न प्रतिफल
यह एक सरल अंक-आधारित प्रश्न-विचार है। प्रश्नकर्ता से कहा जाए कि वह 1 से 108 के बीच कोई एक संख्या मन में रखकर अथवा अपनी इच्छा से बताए।
उस संख्या को 12 से भाग देकर प्राप्त शेष के आधार पर फल कहा जाता है।
शेषानुसार फल
शेष फल
1, 7, 9 कार्य में विलंब होगा
4, 5, 8, 10 निष्फलता अथवा कार्य की गति रुकने का संकेत
11 कार्य-सिद्धि का विशेष संकेत
0, 2, 3, 6 कार्य सिद्ध होने का संकेत
> नोट: यदि 12 शेष की भाषा प्रयोग की जाए तो गणितीय दृष्टि से 12 का शेष वास्तव में 0 होता है; इसलिए इसे 0 (अर्थात् 12) के रूप में समझना अधिक स्पष्ट रहेगा।
---
प्रश्न-विचार का मूल उद्देश्य
इन सूत्रों का उद्देश्य केवल गणना करना नहीं, बल्कि प्रश्न के समय, प्रश्नकर्ता की मानसिक स्थिति और प्रश्न के संभावित फल का संकेत प्राप्त करना है।
एक ही सूत्र को हर परिस्थिति में अंतिम निर्णय न मानकर, प्रश्न की प्रकृति के अनुसार तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा प्रश्नकर्ता की जन्मकुंडली से भी मिलान करना अधिक उचित माना जा सकता है।
संक्षिप्त क्रम
सत्य-असत्य → वार + योग + नक्षत्र + तिथि
वृष्टि → वर्तमान नक्षत्र
धन → नामाक्षर
कार्य का समय → तिथि + वार + नक्षत्र
त्वरित प्रश्न → 1 से 108 का अंक
इस प्रकार ये सूत्र प्रश्न-ज्योतिष की एक सरल प्रारंभिक पद्धति के रूप में व्यवस्थित किए जा सकते हैं।
********************************
कभी-कभी लोग सच मे प्रश्न पूछते हैं, तो कभी आपको बना रहे होते हैं, कि देखे आप समझ पाते हैं या नही।
तो पूछने के आधार पर आप निम्न सूत्र को अपना कर जान सकते हैं कि सामने वाला जो प्रश्न कर रहा है वो बात सच है या झूठ?
● यह बात सच है या झूठ?
Is this thing true or false?
वार+योग+नक्षत्र×तिथि= +4
-----------------------------------=शेष
3
शेष 1 सच बात,2 से झूठी,0 से कच्ची।।
वार, योग,नक्षत्र मिलावो।तिथि से गुनि पुनि चार मिलावो।।
भाग तीन का तब दै देहु।मिथ्या सत्य विचार कहेउ।।
एक बचे सच बात मान लो।दो से बिल्कुल झूठ जानलो।।
शून्य बचे तो पहिले सच्ची।पीछे झूठी सो अब कच्ची।।
**********************************
● वृष्टि कब होगी?
When will the rain?
वर्तमान नक्षत्र×2
-------------=शेष
3
1 शेष तत्काल वृष्टि।
2 शेष कुछ समय बाद।
0 शेष वृष्टि नही होगी।
*********************************
● इससे धन मिलेगा या नही?
Will it get money or not?
प्रभु(जिस नाम से विचार करना है) नामाक्षर तिगुण करि, निज नामाक्षर फेर।
तिन भाग दे जानु धन बहुत मिलो या थोर।
एक बचे धन प्राप्ति बतावे,दुई दमड़ी नही भेंट करावे।।
*********************************
तो पूछने के आधार पर आप निम्न सूत्र को अपना कर जान सकते हैं कि सामने वाला जो प्रश्न कर रहा है वो बात सच है या झूठ?
● यह बात सच है या झूठ?
Is this thing true or false?
वार+योग+नक्षत्र×तिथि= +4
-----------------------------------=शेष
3
शेष 1 सच बात,2 से झूठी,0 से कच्ची।।
वार, योग,नक्षत्र मिलावो।तिथि से गुनि पुनि चार मिलावो।।
भाग तीन का तब दै देहु।मिथ्या सत्य विचार कहेउ।।
एक बचे सच बात मान लो।दो से बिल्कुल झूठ जानलो।।
शून्य बचे तो पहिले सच्ची।पीछे झूठी सो अब कच्ची।।
**********************************
● वृष्टि कब होगी?
When will the rain?
वर्तमान नक्षत्र×2
-------------=शेष
3
1 शेष तत्काल वृष्टि।
2 शेष कुछ समय बाद।
0 शेष वृष्टि नही होगी।
*********************************
● इससे धन मिलेगा या नही?
Will it get money or not?
प्रभु(जिस नाम से विचार करना है) नामाक्षर तिगुण करि, निज नामाक्षर फेर।
तिन भाग दे जानु धन बहुत मिलो या थोर।
एक बचे धन प्राप्ति बतावे,दुई दमड़ी नही भेंट करावे।।
*********************************
• कार्य कब होगा?
कार्य कब होगा, ऐसा प्रश्न होने पर प्रश्न दिवस की तिथि, वार, नक्षत्र की संख्या का योग करें तथा योग संख्या में तीन का गुणा करें, प्राप्त फल में छः और जोड़े।
अब पुनः प्राप्त फल में नौ का भाग देवें, एक शेष बचने पर एक पक्ष में, दो शेष में मास, तीन शेष में ऋतु, चार शेष रहते छः माह, पांच में एक दिन, छः में एक रात, सात में तीन घंटे में या एक प्रहर में, आठ में यथा समय में (तत्काल), और शून्य शेष रहते शीघ्र कार्य समाधान बने।
उदाहरण-
प्रश्न- 22/06/2025 को किसी ने प्रश्न किया कि मेरा अमुक कार्य कब तक होगा?
उत्तर- विक्रम संवत् २०८२ शक संवत् १९४७ आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि, रविवार दिन, भरणी नक्षत्र।
12+1+2=15 प्राप्त फल में तीन का गुणा किया, 6 जोड़े और 9 का भाग दिया।
15×3=45+6=51÷9=6 शेष
अर्थात् एक रात में कार्य हो जाएगा।
*************************
• अंक प्रश्न प्रतिफल
प्रश्नकर्ता से प्रश्न करते समय 108 संख्या के भीतर कोई अंक कहावे।
प्राप्त अंक संख्या को 12 से भाग देवें तथा शेष 1- 7- 9 रहे तो विलंब से कार्य हो,
4- 5- 8- 10 बचे तो निष्फल गति,
11 बचे तो सिद्धि,
0- 2- 3- 6- 12 शेष रहे तो कार्य सिद्ध होगा।
******************************
Related topics-
● जानें अपने शत्रु को उसकी राशि अनुसार Know your enemy according to its amount
● जन्म पत्री मृतक की है या जीवित की Birth certificate is dead or alive

No comments:
Post a Comment